खुलासा: बहकता विवेक: सत्तापक्ष और विपक्ष के बीमारों में भेदभाव

प्रमोद कुमार डोभाल

उत्तराखंड की डबल इंजन सरकार में गरीब और बीमारों की अलग तरीके से छंटनी हो रही है। यदि कोई बीमार या गरीब व्यक्ति सत्ताधारी दल का है तो उसकी जल्दी सुनवाई हो रही है, किंतु यदि वह व्यक्ति उस विधानसभा से है, जहां कि भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार नहीं जीता तो उसकी डबल इंजन सरकार में कोई सुनवाई नहीं है। यह गरीब और बीमार की किस्मत है कि वो सत्ताधारी दल का है या विपक्ष का।

यह पहला अवसर है जब गंभीर रूप से किडनी और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के साथ भी सत्ताधारी विधानसभा और विपक्ष की विधानसभा के नाम पर संस्तुतियां हो रही हैं। केदारनाथ से कांग्रेस के विधायक मनोज रावत ऐसे गंभीर किस्म के कई मरीजों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए सरकार को आग्रह कर चुके हैं, किंतु इन बीमारों के प्रति भी सरकार का नजरिया विपक्ष वाला ही रहा।
रानीखेत से कांग्रेस विधायक करन माहरा ने अपनी विधानसभा के 18 लाख रुपए से अधिक के प्रस्ताव मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के लिए भेजे। रानीखेत में लगी आग में पांच घरों को जब नुकसान हुआ तो उन पांचों की सूची करन माहरा ने मुख्यमंत्री को भेजी, किंतु उनमें से सिर्फ एक व्यक्ति, जो कि भारतीय जनता पार्टी से थे, को 25 हजार रुपए दिए। करन माहरा का कहना है कि रानीखेत विधानसभा की उनकी संस्तुतियों की फाइल उनके प्रतिद्वंदी रहे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के पास सरकार स्क्रूटनी के लिए भेजती है। इसलिए उनकी संस्तुति पर किसी गरीब को आर्थिक सहायता नहीं मिलती।
70 में से 57 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने दल के विधायकों पर तो मेहरबान रही, किंतु विपक्षियों के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया, मानो वे भारत के नागरिक ही न हों।
सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2017-18 में सरकार द्वारा मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष का जो विवरण दिया गया है, वह आश्चर्यजनक है। धारचूला से दूसरी बार कांग्रेस के टिकट पर जीतकर आए हरीश धामी की संस्तुति पर एक भी रुपए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से किसी गरीब या बीमार को नहीं दिए गए। कांग्रेस के जसपुर से विधायक आदेश चौहान की संस्तुति पर चार लोगों को 60 हजार रुपए दिए गए। कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की संस्तुति पर एक लाख 5 हजार रुपए दिए गए। कांग्रेस के करन महरा की संस्तुति पर 25 हजार रुपए, काजी निजामुद्दीन की संस्तुति पर एक लाख 60 हजार रुपए, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की संस्तुति पर पांच हजार रुपए, मनोज रावत की संस्तुति पर 75 हजार, ममता राकेश की संस्तुति पर 3 लाख 40 हजार रुपए, राजकुमार की संस्तुति पर 2 लाख 75 हजार रुपए, फुरकान अहमद की संस्तुति पर एक लाख 45 हजार रुपए जारी किए गए।


विपक्ष के विधायकों के साथ प्रचंड बहुमत का यह रवैया भले ही मुख्यमंत्री के विवेक पर निर्भर करता हो, किंतु 11 विधानसभा के आम लोगों के साथ यह व्यवहार स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। सरकार ने अपने साथ चल रहे निर्दलीय राम सिंह कैड़ा की संस्तुति पर 31.20 लाख व प्रीतम सिंह पंवार की संस्तुति पर 18.15 लाख रुपए रिलीज किए।
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के सर्वेसर्वा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने स्वयं 9 करोड़ 47 लाख 42 हजार रुपए बांटे। जिसमें डोईवाला विधानसभा का विशेष ध्यान रखा गया। मुख्यमंत्री के अलावा विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल की संस्तुति पर 31 लाख 15 हजार, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान की संस्तुति पर 28.34 लाख, राज्य मंत्री धन सिंह रावत की संस्तुति पर 45.80 लाख, प्रकाश पंत 46.89 लाख, मदन कौशिक 52.24 लाख, यशपाल आर्य 29.14 लाख, रेखा आर्य 27.55 लाख, सतपाल महाराज 49.45 लाख, सुबोध उनियाल 47.89, हरक सिंह रावत 35.56 लाख, अरविंद पांडे 51.96लाख, आदेश चौहान की संस्तुति पर 51 लाख 33 हजार रुपए स्वीकृत किए गए। उमेश शर्मा काऊ की संस्तुति पर 51 लाख 76 हजार दिए गए। केदार सिंह रावत 40.32 लाख, खजान दास 44.50 लाख, गणेश जोशी 47.90 लाख, चंदनराम दास 42.22 लाख, दीवान सिंह बिष्ट 40.5 लाख, धन सिंह नेगी 45.10, प्रदीप बत्रा 42.3 लाख, पूरन फत्र्याल 43.41 लाख, पुष्कर धामी 47.6 लाख, बंशीधर भगत 47 लाख, स्व. मगन लाल शाह 46.1 लाख, मुन्ना सिंह चौहान 41.9 लाख, महेंद्र भट्ट 45.34 लाख, विजय सिंह पंवार 43.7 लाख, विनोद कंडारी 49.10 लाख, संजय गुप्ता 40 लाख, सुरेंद्र सिंह नेगी 45 लाख, सहदेव पुंडीर 40.78 लाख, हरबंश कपूर की संस्तुति पर 50 लाख की भारी भरकम धनराशि निर्गत की गई।

मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की बंदरबांट उत्तराखंड बनने से बदस्तूर जारी है, किंतु डबल इंजन की सरकार आने के बाद यह उम्मीद जरूर जगी कि अब इस मसले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की बजाय पीडि़त व्यक्ति को सरकार राहत देगी, न कि सत्ता पक्ष का गरीब और विपक्ष का बीमार के बीच खाई खोदगी।

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