जल क्रीड़ा के बाद अब आकाश में  खेलने की तैयारी

डीएम ऊत्तरकाशी आशीष चौहान की अनूठी पहल। झील के फ्लोटर पर उतरेंगे पैरा ग्लाइडर। पर्यटन को लग सकते है रोमांच के पंख

गिरीश गैरोला

जल क्रीड़ा के बाद जल्दी ही पर्यटक हवा में उड़ते नजर आएंगे। भले ही पर्यावरण को देखते हुए जल विधुत परियोजनाओं पर ब्रेक लग गया हो किन्तु कर्मवीर कभी थक हार कर चुप नही बैठते से तो हर परिस्थिति  में नई राह तलास कर ही लेते है। ऊत्तरकाशी का वरुणावत पर्वत भले ही अब तक वर्ष 2003 की आपदा के प्रतीक के रूप में याद किया जाता रहा हो किन्तु अब जल्द ही इसे रोमांच के पर्यटन से जाना जाएगा। पर्यटन की नई परिभासा गढ़ते हुए डीएम ऊत्तरकाशी के प्रयासों के बाद पहाड़ी से हवा में पंछी की तरह उड़ते हुए पर्यटक झील में उतर कर रोमाचिक  पर्यटन से लोगों को रूबरू करेंगे।

उत्तरकाशी जनपद के नौजवान और ऊर्जावान डीएम डॉक्टर आशीष चौहान ने साबित कर दिया है कि इंसान कुछ नया करने की सोच ले तो रास्ते अपने आप तैयार हो जाते हैं,  बस एक दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है । उत्तरकाशी में खाली पड़ी जोशियाड़ा झील मैं नौकायन और राफ्टिंग की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं संपन्न करवाने के बाद  अब आकाश में भी वायुमार्ग से खेलने की तैयारी शुरू हो गई है ।

डीएम उत्तरकाशी डॉक्टर आशीष कुमार चौहान ने इससे पूर्व भी पैराग्लाइडिंग और पैरासेलिंग के लिए एक्सपर्ट की टीम से सर्वे के तौर पर ट्रायल   करा   चुके है । अब छात्रो को हवा में उड़ने के लिए तैयार करने की तैयारी शुरू हो गयी है।


उनकी मनसा  है कि उत्तरकाशी के वरुणावत टॉप से पैराग्लाइडर उड़ते हुए  जोशियाड़ा  झील के फ्लोटिंग जेट्टी में  उतरेंगे।  इस दौरान एक बड़ा एयर शो रखने की व्यवस्था की जा रही है , जिसमें ज्यादा से ज्यादा स्कूली छात्रों को शामिल किया जाएगा ताकि जल क्रीड़ा के नए वाटर स्पोर्ट्स के साथ हवा में कलाबाजियां खाते हुए पैराग्लाइडर्स पर्यटन की एक नई परिभाषा लिख सकें।

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