जिला पंचायत अध्यक्षा के नहले पर प्रतिपक्ष का दहला

गिरीश गैरोला/ उत्तरकाशी//

अध्यक्षा की कुर्सी खतरे मे घोटालों पर कार्रवाई की तलवार भी सर पर

अध्यक्षा जिला पंचायत की प्रेस के बाद सदस्य दीपक बिजलवाण  उतरे मैदान मे!

अध्यक्षा पर मानहानि का दावा करने और आरोप साबित होने पर राजनीति से सन्यास लेने की  घोषणा

अध्यक्ष पर लगाई आरोपों  की झड़ी।जिला पंचायत मे बिगड़ा अंकों का गणित।विपक्षियों की तादाद 9 से हुई 14 एक दिन पूर्व उत्तरकाशी के जिला पंचायत अध्यक्ष जसोदा राणा द्वारा पत्रकार वार्ता मे अपर मुख्य अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार देख रहे सीडीओ आईएएस विनीत कुमार के साथ सदस्य दीपक कुमार पर ब्लैक मेलिंग का जो आरोप लगाया गया उसके जबाबी हमले मे सदस्य जिलापंचायत दीपक बिजलवाण ने भी पत्रकार वार्ता कर अपना पक्ष रखा ।गौरतलब है कि अध्यक्षा ने एक ही दिन मे 660 एस्टिमेट तैयार कर एक करोड़ 94 लाख 67 हजार का अग्रिम चेक सिंचाई विभाग को देने के लिए दबाव बनाकर ब्लैक मेलिंग करने का आरोप उक्त दोनों  पर लगाया था।

गुरुवार को अध्यक्षा जिला पंचायत उत्तरकाशी ने प्रेस वार्ता मे जो विस्फोट किया उसके जबाब  मे 14 सदस्यों के साथ दीपक बिजलवाण ने कमान पूरी तरह से संभालकर सभी आधुनिक अस्त्रों से जबाबी फायर किया है। उन्होने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा विकास योजनाओं मे की गयी गडबड़ियों पर उनके द्वारा समय – समय पर विरोध दर्ज कराया गया है जो बोर्ड की कार्यवाही मे आज भी मौजूद है , जिसे अध्यक्षा दबाव और ब्लैक मेलिंग बता रही है ।

उन्होने चेतावनी दी कि अध्यक्षा के पास उनके द्वारा लगाए आज्ञे आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई भी प्रमाण है तो वे कानूनी कार्यवाही झेलने के लिए तैयार हैं इतना ही नहीं वे राजनीति से भी सन्यास  भी  ले लेंगे।

प्रेस वार्ता मे दीपक बिजलवाण ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अध्यक्ष जिला पंचायत की कार्य प्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होने बोर्ड मे एक करोड़ 15 लाख की अतिरिक्त धनराशि से अध्यक्ष के क्षेत्र गड़ोलो मे गेस्ट हाउस और मीटिंग हाल निर्माण बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए और बिना बोर्ड की सहमति से कराये जाने पर सवाल उठाए हैं।

दीपक ने आरोप लगाया कि राज्य वित्त से मिले 12 करोड़ की धन राशि  मे से महज 8 करोड़ को ही दिखाया गया जबकि  बचे हुए 4  करोड़  बिना बोर्ड की सहमति के खर्च कर दिये गए जिसके खिलाफ उन्होने शिकायत भी की  थी।

इसके अलावा बिना शासन से अनुमोदन के कर्मचारियों को नौकरी पर ही नहीं रखा गया बल्कि उन्हे पदोन्नति भी दी गयी और विवादित व्यक्तियों  को भी स्थायी नौकरी दे गयी और सवाल उठाने पर खुद कर्मचारियों से मिलकर अध्यक्षा द्वारा हड़ताल कारवाई गयी है।

आरोप – प्रत्यारोप के इस युद्ध और विकास योजनाओं की बंदर बाँट मे  गुटबाजी बढने पर घोटालों की बू भले ही बाहर निकालने लगी है किन्तु 25 सदस्यों के जिला पंचायत बोर्ड मे जनता के पल्ले कुछ पड़े या न  पड़े पर इस दौरान विपक्षियों की तादाद 9 से बढ़कर 14 हो गयी है, वहीं  लोकतन्त्र की खूबी के चलते अभी भी अध्यक्ष का पद सुरक्षित है और नाराज सदस्य प्रमुख सचिव पंचायती राज विभाग उत्तराखंड सरकार को 22 अगस्त को भेजे गए भेजे गए वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता पर कार्यवाही का इंतजार कर रहा है।

जिसमे दैनिक / उपनल / संविदा पर बिना  शासन की अनुमति के नियुक्ति  देने , यमनोत्री यात्रा व्यवस्था-  कुली एजेंसी / गंगनानी हुट्स / माघ मेला 2015- 2016 -2017 मे की गयी अनियमितता की जांच प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट से कराने , जिला पंचायत की परिसंपत्तियों पर विभाग के ही कर्मचारियों द्वारा अवैध कब्जा और पूर्व अध्यक्ष द्वारा निरस्त की गयी कंप्यूटर  आॅपरेटर के संविदा के पद को  द्वितीय श्रेणी के लिपिक पद पर की गयी अनियमितता की जांच शामिल है।

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