…तो मुख्यमंत्री के दबाव में पलटी गई ढैंचा रिपोर्ट!

टीएसआर एवं उनके कारिंदों को दी गई क्लीन चिट बलि का बकरा बनाया गया सिर्फ निदेशक को मा. उच्चतम न्यायालय तक घसीटेगा मोर्चा, मुख्यमंत्री को जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन ने पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि वर्ष २०१० में कृषि मंत्री रहते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत (वर्तमान मुख्यमंत्री) ने अपने पद […]

टीएसआर एवं उनके कारिंदों को दी गई क्लीन चिट
बलि का बकरा बनाया गया सिर्फ निदेशक को
मा. उच्चतम न्यायालय तक घसीटेगा मोर्चा, मुख्यमंत्री को

जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन ने पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि वर्ष २०१० में कृषि मंत्री रहते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत (वर्तमान मुख्यमंत्री) ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने कारिंदों के साथ मिलकर ढैंचा बीज घोटाले को अंजाम दिया था। इस घोटाले की राज्य में गूंज शुरू होने के साथ उक्त मामले में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के साथ वर्ष २०१३ में एकल सदस्यीय एससी त्रिपाठी जांच आयोग का गठन किया, जिसमें ढैंचा बीज घोटाले की जांच हेतु निर्देशित किया गया।
उक्त मामले की गहन जांच के उपरांत त्रिपाठी जांच आयोग द्वारा तत्कालीन कृषि मंत्री त्रिवेंद्र रावत के खिलाफ तीन बिंदुओं पर कार्यवाही की सिफारिश की, जिसमें कृषि अधिकारियों का निलंबन एवं फिर उस आदेश को पलटना, सचिव कृषि की भूमिका की जांच विजिलेंस से कराए जाने के मामले में अस्वीकृति दर्शाना तथा बीज डिमांड प्रक्रिया सुनिश्चित किए बिना अनुमोदन करना। इस प्रकार आयेाग ने इसे उत्तर (अब उत्तराखंड) कार्य नियमावली १९७५ का उल्लंघन माना है। आयोग ने श्री रावत के खिलाफ सिफारिश की है कि श्री रावत Prevention & Corruption Act 1988  की धारा १३ (१) (d) (iii) के अंतर्गत आते हैं तथा सरकार उक्त तथ्यों का परीक्षण कर कार्यवाही करे।
उक्त घोटाले की जांच यानि त्रिपाठी जांच आयोग की रिपोर्ट को सदन के पटल पर पूर्व में रखा गया था, जिसमें गहन जांच के आदेश सदन ने दिए थे। अभी हाल ही में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी पावर का इस्तेमाल कर पूरी जांच रिपोर्ट ही पलटवा दी तथा अपने अलावा अपने कारिंदों को भी क्लीनचिट दिलवा दी। उक्त मामले में कार्यवाही ज्ञापन (Action Taken Report)  में सिर्फ तत्कालीन निदेशक मदनलाल को ही दोषी ठहराया गया है, जबकि पूरा घोटाला टीएसआर के इशारे एवं उनके निर्देशन में हुआ है।
नेगी ने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जो आरोप त्रिवेंद्र सिंह रावत पर त्रिपाठी जांच आयोग ने तय किए थे, उनको सिरे से खारिज कर दिया गया, जबकि वो आरोप आज भी स्थित हैं। आनन-फानन में खुद को एवं अपने कारिंदों को बचाने के लिए टीएसआर सरकार ने जांच रिपोर्ट पलट कर इस अनैतिकता को अंजाम दिया तथा जुलाई २०१७ को मा. न्यायालय में प्रति शपथ पत्र एवं एवं ये क्लीनचिट दाखिल करने के निर्देश दिए। जनसंघर्ष मोर्चा का कहना है कि मा. सुप्रीमकोर्ट तक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को घसीटेगा।

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