रंवाई मे अनावृष्टि से किसानों की खुशी पर तुषारापात

पुरोला।नीरज उत्तराखंडी  जनपद उत्तरकाशी के रंवाई घाटी में 4 अक्तूबर को हुई भारी ओलवृष्टि से कटाई और मडाई के लिए तैयार धान की फसल नष्ट हो गई।किसानों ने शासन प्रशासन से मौका मुआयना कर फसल का उचित मुआवजा दिये जाने तथा कृषि ऋण माफ करने की  मांग की है। खेतों में धान से लदी बालियां […]

पुरोला।नीरज उत्तराखंडी 
जनपद उत्तरकाशी के रंवाई घाटी में 4 अक्तूबर को हुई भारी ओलवृष्टि से कटाई और मडाई के लिए तैयार धान की फसल नष्ट हो गई।किसानों ने शासन प्रशासन से मौका मुआयना कर फसल का उचित मुआवजा दिये जाने तथा कृषि ऋण माफ करने की  मांग की है।
खेतों में धान से लदी बालियां चन्द समय में खाली हो कर सुनी हो गई, ओलो के तीक्ष्ण प्रहार से खेत में घायल अवस्था में बिछी धान की पौध,तबाही की तस्वीर बयां कर रही थी।खेतों में बिखरी प्राण विहीन पराली किसानों की मेहनत पर पानी फिरने की कहानी बयां कर रही थी। मौसम ने पल भर पर किसानों के चेहरे की चमक और मुस्कान पल भर में  मायूसी और उदासी में बदल दी।
रामासिराई क्षेत्र के अधिकांश गाँव में गुरूवार सायं चार बजे  के करीब भारी ओलावृष्टि के कारण धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। क्षेत्र के गुंदियाट गाँव, नागझाला, डिकाल गाँव, कंडियाल गाँव, पोरा,बसंत नगर, रामा,बेस्टी,महर गाँव, कंडिया, रेवड़ी,आदि गाँव में भारी ओलावृष्टि के कारण खड़ी लाल चावल की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
ब्लाक प्रमुख शारदा राणा ने बताया कि इस भारी नुकसान के कारण किसानों के सामने आजीविका संकट पैदा हो गया है। उन्होंने जिलाधिकारी से क्षतिग्रस्त फसल का शीघ्र मूल्यांकन कर मुआवजा देने की मांग की है।
साल भर परिवार के भरण-पोषण के साथ ही किसानों की आर्थिकी का एक मात्र जरिया धान की खेती पर कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि पल भर में उनके सपनों पर पानी फेर दिया ।
लाल चावल की चरधान किस्म की पैदावार के लिए विख्यात रवांई घाटी को लाल चावल कटोरा कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं  होगी।
रवांई घाटी में पैदा होने वाले चरधान की खुशबू सिर्फ़ उत्तरकाशी में  ही नहीं वल्कि पड़ोसी हिमाचल प्रदेश सहित  विभिन्न राज्यों में बिखेरने वाला चरधान मौसम की मार के आगे इस समय असहाय हो कर खेत और खलिहान से किसानों के कोठार अन्न भण्डार में पहुँचने से पहले ही खेतों में ही खेत हो गया ।
पौष्टिकता, स्वाद तथा खुशबू और चमक से भरपूर और सराबोर लाल चावल के शौकीन के लिए इस समय असहज तथा किसानों को भुखमरी के कगार पर लाने वाली खबर से सब स्तब्ध है। मौसम ने किसानों की मेहनत पर फिरा पानी फेर दिया ।
असमय ओलावृष्टि से धान की फसल को भारी नुकसान होने से इस समय चरधान बाजार में अपनी धूम और खुशबू नहीं बिखेर पायेगा।मौसम की मार ने किसानो की आर्थिकी और आजीविका की रीढ़ तोड़ दी है।किसनों को अब बैंक का कर्ज चुकाने सहित आजीविका का संकट गहरा गया है। किसानों का कहना है कि उनके सामने आजीविका तथा दवा खाद का उधार तक चुकाने का संकट पैदा हो गया है ।
खेतों  में कटने को तैयार धान की फसल ओलवृष्टि की भेंट  चढ़ गई।ओलो ने तैयार फसल मिट्टी में  मिला दी।खलिहान में  मडाई के लिए रखी धान की फसल भीग कर खराब  हो गई ।
किसनों ने प्रशासन से मौका मुआयना कर फसल  का उचित  मुआवजा दिये जाने  तथा सरकार से कृषि  ॠण  माफ करने की मांग  की है ।
बहरहाल अब यह देखना शेष है कि क्या सरकार किसानों के  संकट की साझीदार बनेगी ?

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