राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ेंगी उत्तराखंड की मंडियां

भारत सरकार द्वारा देश में कृषकों की आय को दोगुना करने के लिए काफी जोर शोर से प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कृषि बाजार के नाम से एक ऐप बनाया गया है, जिससे पूरे देश की सभी मंडियों को आपस में जोड़ा जा रहा है। पूरे देश में अब तक 506 मंडियों का कृषि उत्पादों का इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग शुरू कर दी गई है।

मंगलवार 24 अप्रैल 2018 को देहरादून मंडी में प्रदेश के किसानों के साथ और मंडी के अधिकारियों के साथ भारत सरकार से आए हुए अधिकारी राष्ट्रीय कृषि बाजार के उत्तराखंड प्रदेश समन्वयक आयुष अग्निहोत्री द्वारा प्रदेश के कुछ किसानों और मंडी समिति के सदस्यों अधिकारियों को ट्रेनिंग दी गई। राष्ट्रीय कृषि बाजार का मुख्य उद्देश्य कृषकों को पूरे देश में उचित दाम दिलाने के लिए विकल्प उपलब्ध कराए जाना है, जैसे कि भौगोलिक कंडीशन के हिसाब से उत्तराखंड में आलू और सेब की पैदावार अधिक होती है जबकि अन्य प्रदेशों में इन उत्पादों की पैदावार काफी कम है, जिससे उन प्रदेशों में इन उत्पादों की रेट काफी अधिक होते हैं, जबकि उस स्थानीय किसान को स्थानीय मंडी में अधिक दाम नहीं मिल पाते हैं, जिससे किसानो को काफी नुकसान होता है। इसी के मद्देनजर और बिचौलियों का सिस्टम खत्म करने के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कृषि बाजार नाम से एक पोर्टल बनाया गया है। जिसके माध्यम से पूरे देश की मंडियां और किसान दूसरे प्रदेश के किसानों और मंडियों के भाव का पता किया जा सकता है। साथ ही अपने कृषि उत्पादों को अच्छे मूल्य पर बेचा जा सकता है।

सरकार की इस पहल से किसानों की अच्छी आय की उम्मीद की जा रही है। राष्ट्रीय कृषि बाजार का मुख्य उद्देश्य छोटे किसानों को फायदा पहुंचाने और बिचौलियों का समाप्त करना है। वर्तमान में कृषकों का सबसे अधिक मुनाफा बिचौलिया खा जाते हैं। जैसे कि देहरादून की मंडी में मशरूम उत्पादन से जुड़े सभी किसान अपना उत्पादन स्थानीय रेट के हिसाब से बिचौलियों को देते हैं, जो कि 50 से 100 रुपए प्रति किलो तक खरीदते हैं। इसी माल को अन्य प्रदेशों में और बड़े संस्थानों में बिचौलिया काफी अधिक दामों पर बेचते हैं। जिससे सबसे अधिक मेहनत करने वाले वर्ग किसान को बहुत कम मुनाफा मिल पाता है, जबकि सबसे कम मेहनत करने वाले बिचौलिया को काफी अधिक फायदा हो जाता है। इस सिस्टम को समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार भी किसानों की आय को दोगुना करने के लिए और पहाड़ में पलायन की गति को कम करने के लिए कृषि उत्पाद को ही एकमात्र सबसे बड़ा जरिया मानती है, इसलिए प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में काफी प्रयास किए जा रहे हैं।

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा प्रदेश की एकमात्र मंत्री के रूप में अभी तक भारत सरकार से 1100 सौ करोड़ रुपया कृषि क्षेत्र के लिए लाना अपने आप में यह दर्शाता है कि भारत सरकार के साथ ही प्रदेश सरकार भी कृषि के क्षेत्र में काफी सकारात्मक सोच रखती है।

बहरहाल, सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय कृषि बाजार परियोजना का किसानों को अधिक आय होने की संभावना जताई जा रही है।

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