वन विभाग का जंगलराज: तैनाती देहरादून और आदेश दे रहे हैं हरिद्वार में

विनोद कोठियाल

वन विभाग में राजाजी राष्ट्रीय पार्क हरिद्वार में तैनात रह चुके डीएफओ एचके सिंह का हरिद्वार से विशेष प्रेम है, क्योंकि एचके सिंह का हरिद्वार से स्थानांतरण हुए एक वर्ष से अधिक समय हो गया है और वर्तमान में मुख्यालय में संबद्ध है। हरिद्वार जनपद में खनन का कारोबार सबसे अधिक है और इसीलिए स्टोन क्रशर भी काफी लगे हैं। अधिकतर स्टोन क्रशर राजाजी राष्ट्रीय पार्क की सीमाओं से लगे हैं। उन्हें अनुमति तभी मिल पाती है, जब वन विभाग द्वारा एनओसी जारी की जाती है।
मानकों के अनुसार राष्ट्रीय पार्क से सात किलोमीटर की दूरी पर ही यह अनुमति मिलती है। खनन के कारोबार में खूब सेटिंग-गेटिंग चलती है, तभी तो हरिद्वार में तैनात होने के लिए ऊंची सिफारिशें करवानी पड़ती है।


ऐसा ही स्टोन क्रशर की अनुमति का एक मामला जिलाधिकारी के पास आया। जिलाधिकारी ने अनुमति के लिए वन विभाग को भेज दिया। निदेशक राजाजी राष्ट्रीय पार्क द्वारा अनुमति देने से मना कर दिया गया, क्योंकि उनके द्वारा कहा गया कि मामला उनके क्षेत्र से बाहर का है। यह मामला 24 मई 2018 का है और उस समय हर्षित कुमार सिंह मुख्यालय में अटैच थे। उन्होंने तुरंत यह मामला लपक लिया और डीएम हरिद्वार को 29 मई को पत्र लिखा कि सिद्धन्त स्टोन क्रशर राजाजी राष्ट्रीय पार्क से दस किलोमीटर दूर है, इसलिए इसमें भण्डारण एवं पर्यावरण की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। यह बात उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के बाद भी उन्होंने यह पत्र जारी किया और और पत्र भी प्रमुख वन संरक्षक के कार्यालय से जारी किया गया, जो कि पूर्ण रूप से नियम विरुद्ध है।
जब आलाधिकारियों को इसकी भनक लगी तो उन्होंने हर्षित कुमार सिंह का स्पष्टीकरण मांगा और वह पत्र भी निरस्त कर दिया, जो हर्षित कुमार सिंह ने जारी किया था। स्पष्टीकरण के जवाब में एचके सिंह ने स्पष्टीकरण लेने वाले अधिकारी राजीव भरतरी पर ही आरोप लगा दिए कि आप द्वारा दुर्भावना से मेरा जवाब तलब किया है।


हर्षित कुमार सिंह का यह पहला मामला नहीं है। उन पर भ्रष्टाचार के काफी आरोप लगे हैं, जिनकी शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता विनोद जैन द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय से भी की गई। विनोद जैन की शिकायत के कारण ही हर्षित कुमार सिंह राजाजी राष्ट्रीय पार्क के निदेशक नहीं बन पाए, नहीं तो उन्होंने अपने घपले-घोटालों को छिपाने के लिए और अपने साथ अन्य भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए निदेशक बनने का पूरा जाल बिछा दिया गया था। विनोद कुमार जैन द्वारा प्रधानमंत्री के अलावा शिकायत राजपुर रोड के विधायक खजानदास से भी की गई, जिन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हर्षित कुमार सिंह को निदेशक बनने से रोकने की मांग की।
वर्तमान में हर्षित कुमार सिंह पर भर्ती घोटाले के अलावा काफी अन्य जांच भी चल रही हैं। बताया जा रहा है कि जांच मे निर्दोष साबित करने के लिए पूरा इंतजाम कर दिया गया है। ऐसे में वे इस जांच में निर्दोष साबित हो जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

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