वरुणावत बनेगा पर्यटक स्थल!

गिरीश गैरोला/ उत्तरकाशी वरुणावत त्रासदी से पर्यटन की उम्मीद पर जिला व्यापार मण्डल ने डीएम, विधायक और पर्यटन मंत्री को दिया सुझाव हिमाचल प्रदेश के कुफऱी की तर्ज पर वरुणावत पर्वत को पर्यटक स्थल विकसित करने का सुझाव वरुणावत त्रासदी की कोख से ही नए पर्यटन की परिभाषा निकल सकती है। उत्तरकाशी जिला व्यापार मण्डल […]

गिरीश गैरोला/ उत्तरकाशी

वरुणावत त्रासदी से पर्यटन की उम्मीद पर जिला व्यापार मण्डल ने डीएम, विधायक और पर्यटन मंत्री को दिया सुझाव
हिमाचल प्रदेश के कुफऱी की तर्ज पर वरुणावत पर्वत को पर्यटक स्थल विकसित करने का सुझाव

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वरुणावत त्रासदी की कोख से ही नए पर्यटन की परिभाषा निकल सकती है। उत्तरकाशी जिला व्यापार मण्डल के जिला अध्यक्ष सुभाष बडोनी ने डीएम डा. आशीष कुमार, विधायक गंगोत्री गोपाल सिंह रावत और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को वरुणावत पर्वत को पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के पर्यटक स्थल कुफऱी की तर्ज पर विकसित कर पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग की है। बडोनी ने कहा कि पलायन से खाली हो रहे गांवों मे आतंक का पर्याय बन चुके जंगली जानवरों को वरुणावत टॉप पर जू बनाकर उसमें रखा जा सकता है।

यहां कुछ झूले लगाकर वीकएंड स्पॉट बनाया जा सकता है। इसके अलावा सनराइज और सनसेट जैसे दृश्य के लिए व्यू पॉइंट भी बनाए जा सकते हैं। जिसके बाद ये सिद्ध होगा कि आपदा की कोख से भी पर्यटन की परिभाषा निकल सकती है।
वर्ष 2003 सितंबर महीने में उत्तरकाशी के शीर्ष पर वर्षा थमने के बाद वरुणवत त्रासदी के रूप में प्रकृति का ऐसा प्रकोप फूटा था। जिसके प्रभाव से पूरा उत्तरकाशी नगर अस्त-व्यस्त हो गया था। करीब 200 व्यापारिक प्रतिष्ठान और दर्जनों होटल और सरकारी कार्यालय इसकी जद में आ गए थे। उसके बाद वरुणावत पहाड़ी का उपचार शुरू हुआ। एशिया में यह ऐसा पहला मामला था, जहां आबादी के ऊपर किसी पहाड़ का उपचार किया गया था।

वरुणवात त्रासदी और उसके बाद इसके उपचार को देखने के लिए बड़ी तादाद में तब भी लोगों की भीड़ उमड़ी थी। तब उत्तरकाशी के डीएम आर मीनाक्षी सुंदरम, जो अब प्रदेश मे वरिष्ठ आईएएस हैं, ने आपदा के अंदर से डिजास्टर टूरिज्म विकसित करने का कॉन्सेप्ट दिया था, जिसे उनके जाते ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
वरुणावत पर्वत के टॉप से उत्तरकाशी का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। साथ ही जोशियाड़ा झील और सामने पहाड़ी पर उछल-कूद मचाते बादल बेहद सुंदर नजारा प्रस्तुत करते हैं। यहां पर हैलीपैड के लायक चौड़ा स्थान भी उपलब्ध है। इसके साथ ही वरुणावत पहाड़ी पर हिन्दू मान्यता के अनुरूप 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसी महत्व के चलते बनारस की तरह उ

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त्तरकाशी में भी वरुणावत पर्वत की पैदल परिक्रमा कर वारुणी यात्रा की जाती है। पर्वत के चारों तरफ सुंदर धार्मिक महत्व के पौराणिक मंदिर हैं।
व्यापार मण्डल ने पर्यटन विभाग को डीएम और विधायक गंगोत्री के माध्यम से सुझाव दिया है कि डिजास्टर टूरिज्म के कान्सेप्ट को आजमाया जाना चाहिए, जिससे राजस्व की भी प्राप्ति होगी और पर्वत की निगरानी भी की जा सकेगी।
वर्तमान में पहाड़ी पर किए गए सीमेंट के उपचार पर घास उगने लगी है, जो उपचार की सेहत के लिए उचित नहीं है और अब इसकी देखभाल के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वन विभाग ने एक गेट लगाकर एक चौकीदार को यहां तैनात किया है, जो निगरानी के लिए नाकाफी है।

गंगोत्री विधायक गोपाल रावत बताते हैं कि उनकी योजना मे कुटेटी देवी से वरुणावत पर्वत तक रोपवे लगाने की है। डिजास्टर टूरिज्म के इस कान्सेप्ट से पर्यटन को तो बढ़ावा मिलेगा ही, स्थानीय व्यापारियों और निवासियों को वीकएंड का पर्यटन पॉइंट भी मिल जाएगा। इससे मिलने वाले राजस्व से पहाड़ी की निगरानी भी की जा सकेगी।

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