वैल्हम गर्ल्स की सुरक्षा से समझौता, हुआ विवाद

सुरक्षा पर ट्रेकर्स विवादः अपूर्ण  दस्तावेज के साथ ट्रैक पर भेजे स्कूली छात्राएं

सुरक्षा मानकों की अनदेखी से नाराज ट्रेकर्स एसोसिएशन ने चलाया चेकिंग अभियान

बिना ट्रेकिंग एक्सपर्ट के भेजे गए थे ट्रैक पर वेल्हम स्कूल के छात्र

गिरीश गैरोला

अपूर्ण सुरक्षा के साथ डोडीताल ट्रैक पर पर्यटकों को भेजने से नाराज उत्तरकाशी ट्रेकर्स एसोसिएशन ने डोडीताल के बेस कैम्प संगमचट्टी में खुद जाकर चेकिंग अभियान चलाया और दस्तावेजों की जांच की और पाया कि ट्रेकिंग में दस्तावेज पूर्ण नहीं थे। उन्होंने सैम एडवेंचर के प्रबंधक से लिखित में लिखवाया कि उनके द्वारा कौन कौन से दस्तावेज जमा करवाये गए हैं। जिसके बाद ट्रेकर्स को डोडीताल की तरफ जाने दिया गया। एसोसिएशन के सचिव मनोज रॉवत ने बताया कि देहरादून की सैम एडवेंचर एजेंसी द्वारा देहरादून के जाने माने स्कूल वेल्हम गर्ल्स की छात्राओं को अपूर्ण दस्तावेजों के साथ ट्रेकिंग के लिए भेजा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मात्र छात्रों की आईडी और प्राचार्य के पत्र के आधार पर वन विभाग ने ट्रैकिंग की अनुमति दे दी, जबकि शपथ पत्र भी  किसी अन्य के नाम से दिया गया है, जिसका ट्रेकिंग से कोई लेना देना नहीं है। ऐसे में स्कूली छात्रों के जीवन सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया है।

नियमानुसार स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसी अपनी जिम्मेदारी पर पर्यटकों को ट्रेकिंग करवाती है, जिसका उनसे शपथ पत्र भरवाया जाता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में  टैक्सी ड्राइवर या कोई भी अन्य व्यक्ति, जिसका पर्वतारोहण और ट्रेकिंग से कोई लेना देना नहीं है। शपथ पत्र भर कर ट्रेकिंग की अनुमति लेने लगेगा। इस दशा में कोई दुर्घटना होने पर कौन जिम्मेदारी लेगा और स्थानीय स्तर पर बनी ट्रेकर्स एसोसिएशन के कोई औचित्य नहीं रह जायेगा।

ट्रेकिंग व्यवसायी मुकेश पंवार ने बताया कि पिछले महीने डोडीताल ट्रेक से तीन पर्यटक मार्ग भटक कर लापता हो गए थे। जिनकी तलाश में बाद में स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसी को ही लगाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अनजान और अनट्रेंड लोगों के साथ ट्रेकिंग करवाने पर हुई दुर्घटना से ट्रेक बदनाम होता है और उनके रोजगार पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि स्थानीय ट्रेकर्स  यहां के मौसम और परिस्तिथि से भिज होते है। लिहाजा उनके साथ ट्रेकर्स ज्यादा सुरक्षित होते है। ऐसे में  वन विभाग को एक ही नियम और नीति से सबको अनुमति देनी चाहिए।

स्थानीय ट्रेकर्स बलदेव राणा ने आरोप लगाया कि उक्त दल द्वारा आप के ग्रुप को नाश्ता करवाने के बाद बेस कैम्प जंगम चट्टी में कूड़ा वही छोड़ दिया गया जिसे उनके साथी वापस लेकर आये है। स्थानीय लोगों को अपने ट्रैक को साफ सुथरा रखने के साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा की चिंता होती है और वे स्थानीय हो, के कारण बेहतर ढंग से इस काम को अंजाम दे सकते हैं।

डीएम आशीष चौहान ने माना कि चांगशील बुग्याल में पर्यटको के बर्फ में दबने के बाद से वन विभाग और ट्रेकर्स समिति के बीच हुई बैठक में पर्यटकों की सुरक्षा पर गंभीर चर्चा हुई थी और सुरक्षा के लिहाज से कुछ गाइड लाइन भी बनाई गई थी। उक्त  मामले में गेंद वन विभाग के पाले में डालते हुए डीएम ने बताया कि डीएफओ ने अपने स्तर जांच के बाद ही स्कूली छात्रों को अनुमति दी है।

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