सख्त ट्रैफिक से नाराज नैनीताल के व्यवसायी

कमल जगाती, नैनीताल

नैनीताल में सीजन के लिए सख्त ट्रैफिक व्यवस्था से नाराज व्यवसाइयों ने आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
उत्तराखण्ड सरकार और उसकी व्यवस्थाओं की बेरुखी के चलते नैनीताल, पर्यटकों की पहली पसंद बनने से महरूम होते जा रहा है। यहां पार्किंग के अभाव में ट्रैफिक जाम, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहा है। पुलिस की सख्ती के कारण पर्यटकों की संख्या लगातार घटती जा रही है, जो व्यवसाइयों की चिंता बढ़ा रही है।

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देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार, नैनीताल में पर्यटन धीरे धीरे कम होते जा रहा है । यहां पहुँचे पर्यटक पिछले कुछ वर्षों से पुलिस और पार्किंग के कारण उपजी परेशानियों से त्रस्त होकर ना खुद लौटकर आ रहे हैं और ना ही दूसरों को यहां आने की सलाह दे रहे हैं। 1990 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद के जन्म के बाद से कुमाऊं में पर्यटन लगातार बढ़ते गया। यहां की पर्यटन इंडस्ट्री ने धीरे धीरे अपने पैर पसारे। रोजगार की तलाश में बाहर जाने वालों को यहीं रोजगार मिलना शुरू हुआ। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होते गई। सरकार ने क्षेत्र के इंफ्रा स्ट्रक्चर पर कोई ध्यान नहीं दिया इसलिए सड़कें और समस्याएं जस की तस बनी रहीं। पर्यटक स्थल बहुत कम विकसित हुए जबकि गाड़ियां और होटल अनियंत्रित तरीके से बढ़ते गए।
इससे पर्यटन का पूरा जोर डेढ किलोमीटर लंबाई वाले नैनीताल के इर्द गिर्द पड़ा। सुंदर वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और मृदुभाषी स्थानीय लोगों के कारण पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती गई। आज देशभर से अपनी गाड़ियों में यहां पहुंचे पर्यटकों को जाम के बाद होटल और फिर सुरक्षित पार्किंग तलाशने में इतना समय लग जाता है जितना उन्हें दिल्ली से यहां पहुंचने में नहीं लगता है।
उत्तराखण्ड बनने के बाद नैनीताल में उच्च न्यायालय स्थापित किया गया। यहां न्यायालय स्टाफ, जज स्टाफ, अधिवक्ता स्टाफ और अन्य मिलाकर कई हजार लोग बस गए, इसके अलावा कई प्रतिष्ठित स्कूलों की लोकप्रियता के कारण भी जनसंख्या बढ़ते गई। नैनीताल में सरकारी/पब्लिक और निजी स्तर पर मिलाकर कुल 2000 गाड़ियों के लिए पार्किंग का स्थान है । सरकार वर्षों से पार्किंग बनाने का केवल आश्वासन दे रही है ।
शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए पुलिस ने कमर कस ली है। सड़कों पर तैनात भारी पुलिस बल कुछ वाहनों के अलावा सभी वाहनों को एक पल के लिए भी सड़क पर खड़े नहीं होने दे रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी हर काम करने में भारी मुश्किल देखने को मिल रही है। बीते वर्ष उच्च न्यायालय के निर्देशों पर जिला पुलिस ने पर्यटकों को काठगोदाम और कालाढूंगी में ही ‘नैनीताल हाउस फुल’ का बोर्ड लगाकर रोक दिया था, जिससे नैनीताल के अधिकतर होटल आंशिक रूप से खाली रह गए थे।  इस वर्ष भी महज 25 से 30 दिनों के मुख्य सीजन में कोई अव्यवस्था लागू होती है, तो आने वाले समय में ना केवल रोजगार कम होगा बल्कि पर्यटन से सरकार को कर के रूप में होने वाली राजस्व की आय में भी काफी गिरावट देखने को मिलेगी।
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने कहा कि अगर पुलिस प्रशासन ने इसी तरह पुलिस व्यवस्थाएं जारी रखी तो उन्हें आंदोलन के रास्ते चलना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि नगर में ट्रैफिक व्यवस्थाएं पिछले वर्षों की तरह ही जारी रखी जाएं।

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