सावधान! शराब पीकर गाड़ी चलाई तो नहीं होगी स्टार्ट!

कुलदीप एस राणा

अब अगर आप शराब पीकर गाड़ी चलाने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए। इसके लिए आवासीय विश्वविद्यालय ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की गई है, जिसे वाहनों पर लगाने से नशे की हालत, नींद या मोबाइल पर बात करने पर ड्राइविंग करनी मुश्किकल हो जाएगी।
अल्मोड़ा आवासीय विवि के कुलपति डा. एचएस धामी ने बताया कि प्रदेश में बढ़ रही वाहन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने की दृष्टि से राज्यपाल केके पॉल ने राज्य के समस्त विवि के कुलपतियों के सन्मुख इस विषय पर शोध कार्य करने का निर्देश दिया। जिसके उपरांत उनके नेतृत्व में आरआई इंस्ट्रुमेंट्स एंड इनोवेशन इंडिया के डा. आरपी जोशी व आकाश पांडे ने मिलकर 2 माह से भी कम समय में एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जिसे अगर गाडिय़ों पर लगा दिया जाए तो नशे की हालत, नींद या मोबाइल पर बात करने पर गाड़ी ड्राइव नहीं की जा सकती।
डिवाइस की इन तमाम खूबियों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए डा. धामी बताते हैं कि यदि ड्राइवर शराब पीकर ड्राइविंग सीट पर बैठता है तो गाड़ी स्टार्ट करने के लिए उसे डिवाइस पर लगे सेंसर पर फूंक मारनी होती है, जिससे डिवाइस में लगा ग्राफीन सेंसर तुरंत एक्टिवेट हो जाएगा और ड्राइवर के ब्लड में एल्कोहल की मात्रा का आंकलन कर लेगा। यदि किसी ने एमवी एक्ट के मानकों से अधिक एल्कोहल का सेवन किया है, तो ऐसी स्थिति में भी गाड़ी स्टार्ट नहीं होगी। यही नहीं यदि ड्राइवर ने चालाकी दिखाते हुए किसी दूसरे व्यक्ति से फूंक मरवाने की कोशिश की तो भी डिवाइस में लगाए गए सेंसर (इंफ्रा रेड सेंसर) गाड़ी को स्टार्ट नहीं होने देगा।
डा. एचएच धामी बताते हैं कि नींद की झपकी आने पर डिवाइस पर लगा इमेजिंग सेंसर ड्राइवर की आंखों की मूवमेंट के आधार पर गाड़ी में बैठे अन्य यात्रियों को सचेत कर देगा कि ड्राइवर को नींद आ रही है, ताकि यात्री तुरंत प्रिवेंटिव उपाय कर गाड़ी को रुकवा सकें। गाड़ी चलाते हुए ड्राइवर द्वारा मोबाइल पर बात करने की स्थिति में भी इमेजिंग तकनीक द्वारा सतर्कता सूचना प्रसार कर देगा।
डिवाइस में ही लगे जीपीआरएस व जीएसएम तकनीक द्वारा गाड़ी की लोकेशन भी जानी जा सकेगी। यदि तकनीकी कारणों से या मानव भूल की स्थिति में गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है तो इस डिवाइस द्वारा 5 से 10 मिनट में 100 नंबर पर डायल होकर स्वत: सूचना चली जाएगी।
विवि के इस अविष्कार को लेकर उत्साहित डा. धामी ने ने कहा कि डिवाइस के फार्मूले को पेटेंट कराने हेतु यूकास्ट के पेटेंट सेल को भेज दिया गया गया है। साथ ही उक्त डिवाइस को गाडिय़ों में लगाने से पूर्व सुरक्षा मानकों की 80 से भी अधिक जांच से गुजरना होगा, जिनकी जांच मानेसर स्थिति आई केट संस्थान, गुडग़ांव स्थित एसजीएस लैब तथा पुणे स्थित एआरएआई संस्थान में चल रही है, इसके उपरांत ही डिवाइस का राज्य सरकार के सम्मुख प्रदर्शन किया जाएगा।
कुल मिलाकर देशभर में आए दिन जिस तरह लगातार दुर्घटनाएं हो रही है, उन्हें रोकने के लिहाज से यह अविष्कार अति महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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