सीएम की घोषणाओं का यह हाल: सरकार का एक साल

 कृष्णा बिष्ट
उत्तराखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यूं तो घोषणा करने में बेहद कंजूसी बरतते हैं, किंतु उनके कार्यालय के अफसर हैं कि चुनिंदा घोषणाओं का भी सही फॉलो अप नहीं रख पा रहे।
 हालत यह है कि किन घोषणाओं पर क्या कार्य हुआ ! इसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय के पास कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गोनिया द्वारा लगाए गए सूचना के अधिकार में यह खुलासा हुआ है कि  विभिन्न विभागों के अंतर्गत  मुख्यमंत्री ने शपथ ग्रहण से लेकर अभी तक कुल 1125 घोषणा ही की है।
 यह घोषणाएं राज्य के 50 विभागों से संबंधित हैं। सूचना के अधिकार में जब यह पूछा गया कि कितनी घोषणाओं पर काम चल रहा है और उन पर कितना धन खर्च हुआ है, साथ ही कितनी घोषणा ऐसी हैं जिन पर काम नहीं हुआ  ! मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह तो बता दिया कि अब तक कुल 1125 घोषणा की गई है। किंतु बाकी के सवालों को यह कहकर जवाब देने से इंकार कर दिया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में इसकी सूचना धारित नहीं है।
 आरटीआई में प्राप्त जानकारी के अनुसार सर्वाधिक 407 घोषणाएं लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत की गई है। पेयजल विभाग 123, शहरी विकास विभाग 101 घोषणाओं के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर है। इनके अलावा सिंचाई विभाग के अंतर्गत 77 घटनाएं और विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत 56 घोषणाएं की गई हैं। पर्यटन विभाग से संबंधित 46 घोषणा की गई है तो आवास विभाग के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने 33 घोषणा की है।(विस्तृत सूचना की छाया प्रति संलग्न है)
 सबसे कम सिर्फ एक-एक घोषणा मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण, ग्रामीण सड़कें, उद्योग, नागरिक आपूर्ति और बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों में की है।
 आपदा प्रबंधन वैकल्पिक ऊर्जा और महिला सशक्तिकरण जैसे विभागों में 2-2 घोषणा की गई है।
 मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का मानना है कि सिर्फ वही घोषणाएं की जानी चाहिए जिन पर बजट की व्यवस्था हो और साथ ही काम लगभग फाइल वर्क के स्तर पर पूरा हो चुका हो। त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने पूर्ववर्तियों की तरह घोषणाओं के घोड़े दौड़ाने में विश्वास नहीं करते, किंतु ब्यूरोक्रेसी का यह हाल है कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का भी रखरखाव नहीं रख पा रही है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाएं गोपन विभाग द्वारा संबंधित विभागों को भेज दी जाती है।

 आवश्यकता के अनुसार मुख्यमंत्री के सचिव संबंधित विभागों की मीटिंग बुलाकर मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुपालन की प्रगति की समीक्षा करते रहते हैं।
 यदि किसी विभाग में मुख्यमंत्री की घोषणाओं के लिए बजट नहीं है तो केवल ऐसी स्थिति में ही वह मुख्यमंत्री कार्यालय से कंटीजेंसी में धन प्राप्त करने के लिए संपर्क करता है। सभी विभाग वित्तीय सत्र की शुरुआत मे ही घोषणाओं के लिए कुछ बजट अलग रख लेते हैं।
 बड़ा सवाल यह है कि यदि मुख्यमंत्री को तुरंत अपने द्वारा की गई घोषणाओं की जानकारी चाहिए हो तो क्या उन्हें राज्य के उन सभी 50 विभागों को एक साथ बुलाना पड़ेगा !
 मुख्यमंत्री की घोषणाओं  का सही  फॉलो अप होने के लिए यह आवश्यकता महसूस की जा रही है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं का रखरखाव और प्रगति समीक्षा के लिए अलग से व्यवस्था की जाए जो सभी विभागों के साथ कोआर्डिनेशन करके समय-समय पर की जा रही घोषणाओं की प्रगति देख सके।

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