- मोरी के खन्यासणी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित, गणित-विज्ञान जैसे विषयों पर संकट
मोरी, उत्तरकाशी। 1 सितंबर 2026,नीरज उत्तराखंडी
विकासखंड मोरी के सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत खन्यासणी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में 43 छात्र-छात्राएं महज एक शिक्षक के भरोसे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यालय में शिक्षकों की कमी ने ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जब एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं और विषयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही हो तो गणित और विज्ञान जैसे जटिल विषयों की पढ़ाई किस तरह प्रभावी ढंग से हो पाती होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा किसी भी समाज और देश के मजबूत भविष्य की बुनियाद है। सरकारें दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शिक्षा पहुंचाने के दावे करती हैं, लेकिन खन्यासणी का विद्यालय इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करता नजर आ रहा है।
एक शिक्षक पर 43 बच्चों की जिम्मेदारी होने के कारण कक्षा संचालन, विषयवार शिक्षण, गृहकार्य की जांच, मूल्यांकन और विद्यालय की अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन भी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में बच्चों को पाठ्यक्रम के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है या नहीं, यह चिंता का विषय है।
गरीब बच्चों के भविष्य से कब तक खिलवाड़?
ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा ही आगे बढ़ने का सबसे बड़ा माध्यम है। यदि सरकारी विद्यालयों में ही पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे बेहतर शिक्षा के अवसरों से कैसे जुड़ पाएंगे।
लोगों का आरोप है कि सक्षम और प्रभावशाली वर्ग अपने बच्चों को बेहतर शिक्षण संस्थानों में पढ़ाकर उनके भविष्य को सुरक्षित कर रहा है, लेकिन दूरदराज के गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षा व्यवस्था तक पर्याप्त नहीं है। इससे शिक्षा के समान अवसर की सरकारी नीति पर भी सवाल खड़े होते हैं।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? शिक्षा विभाग, शासन या स्थानीय जनप्रतिनिधि—इसका जवाब जनता को मिलना चाहिए। उनका कहना है कि वर्षों से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार और शिक्षा विभाग से विद्यालय में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की तैनाती करने की मांग की है, ताकि बच्चों को सभी विषयों की नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
खन्यासणी का यह विद्यालय केवल 43 बच्चों का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि दूरस्थ पहाड़ के गरीब परिवारों के बच्चों को भी क्या शहरों के बच्चों की तरह शिक्षा का समान अधिकार और अवसर मिलेगा? यदि शिक्षा की बुनियादी नींव ही कमजोर रहेगी तो पहाड़ के इन बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने का सपना आखिर कैसे पूरा होगा?


