सरकार करें तो सही ! आम आदमी करे तो गलत !

कानून में छेद सिर्फ पैसे वालों के लिए। ठेकेदार की धमक। नदी को खोद रही निर्माण सामग्री के बहने पर जल विद्युत निगम पर कार्यवाही के लिए कराई रिपोर्ट। जांच के बाद गहरी खामोशी।

गिरीश गैरोला

अपने हिसाब से जानकार लोग किस तरीके से कानून की व्याख्या कर अपने मनमाफिक निर्णय ले लेते हैं,  इसका ताजा उदाहरण उत्तरकाशी के तिलोथ पुल पर  देखने को मिला , जहां ठेकेदार ने भागीरथी नदी के बीचों-बीच Jcb से उपखनिज  खोदने  के काम में लगी है । दरअसल तिलोथ में लगे अस्थायी पुल को हटाकर वहां स्थाई पुल का निर्माण होना है । निर्माण कार्य में लगने वाली रेत बजरी और अन्य उपखनिज  मौके पर ही नदी को खोदकर निकाले जा रहे है । अगर नियमों की बात करें तो जेसीबी से नदी में खुदाई करना अपराध की  श्रेणी में आता है। किंतु ठेकेदार द्वारा दी जाने वाली दलील कि  मौके पर निकलने वाले खनिज को मौके पर ही उपयोग किया जा रहा है और बिल भुगतान के समय MB के अनुसार उप खनिज की रायल्टी काट दी जाती है। यदि यही नियम है तो नदी से लगे हुए सभी निजी भवन स्वामियों को भी नदी में उतर कर खनन की इजाजत मिल जानी चाहिए  ?

इसको लेकर के राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग मौन है। गौरतलब है कि मनेरी भाली फेज-1 की झील से अचानक पानी छोड़ जाने के बाद जब तिलोथ पुल पर काम कर रहे ठेकेदार की जेसीबी मशीन,  पंप , मिक्सर और रेत इत्यादि बह गए थे। तब ठेकेदार की धमक  से जल विद्युत निगम के खिलाफ मुकदमा (एनसीआर) दर्ज करने के बयान समाचार पत्र पत्रों की सुर्खियां बने थे । क्या यह संभव है कि जो ठेकेदार गैर कानूनी ढंग से नदी में JCB उतार कर खनन कार्य में लगे हो वह जल विद्युत निगम के खिलाफ FIR दर्ज करा सके ? क्या यह अपने आप मे सबूत नहीं है कि ठेकेदार द्वारा गैर कानूनी ढंग से नदी में खनन किया जा रहा है?

कोतवाली प्रभारी महादेव उनियाल ने बताया कि इस बारे में एनसीआर पर कोर्ट से जांच के आदेश हुए थे और राजस्व विभाग की तरफ से ADM को अपनी जांच रिपोर्ट देनी है , और जांच के अनुरूप ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।

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