देहरादून।
उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बंटवारे में कई अहम और संवेदनशील विभाग अपने पास ही रखे हैं, जिससे शासन की मुख्य कमान उनके नियंत्रण में बनी रहेगी।
इसके साथ ही मंत्री धन सिंह रावत से स्वास्थ विभाग हटाकर सुबोध उनियाल को दिया गया है। वहीं, मंत्री गणेश जोशी से ग्राम्य विकास हटाकर नए मंत्री भरत चौधरी को दिया गया है।
CM के पास रहे ये महत्वपूर्ण विभाग
जारी सूची के अनुसार मुख्यमंत्री अब भी कई प्रमुख विभागों का जिम्मा संभालेंगे, जिनमें शामिल हैं:
👉 सामान्य प्रशासन
👉 गृह विभाग
👉 कार्मिक
👉 सतर्कता
👉 नियुक्ति एवं प्रशिक्षण
👉 सूचना एवं जनसंपर्क
इन विभागों को शासन संचालन की रीढ़ माना जाता है, जिनके माध्यम से प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण होता है।
नए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी
हाल ही में कैबिनेट विस्तार में शामिल मंत्रियों को उनके विभाग सौंप दिए गए हैं:
🔹 खजान दास
- समाज कल्याण
- अल्पसंख्यक कल्याण
- छात्र कल्याण
- भाषा
🔹 भरत सिंह चौधरी
- ग्राम्य विकास
- लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम (MSME)
🔹 मदन कौशिक
- पंचायती राज
- आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास
- आयुष एवं आयुष शिक्षा
- पुनर्गठन एवं जनगणना
🔹 प्रदीप बत्रा
- परिवहन
- सूचना प्रौद्योगिकी
- सुशासन एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी
- जैव प्रौद्योगिकी
🔹 राम सिंह कैड़ा
- शहरी विकास
- पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन
- जलागम प्रबंधन

क्यों हुआ कैबिनेट विस्तार?
दरअसल, मंत्रिमंडल में लंबे समय से पांच पद खाली चल रहे थे।
तीन पद पहले से रिक्त थे, और एक पद पूर्व मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद खाली हुआ, वही एक पद प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के कारण रिक्त हुआ,इन विभागों का अतिरिक्त भार भी मुख्यमंत्री के पास ही था।
राजनीतिक संतुलन की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विभागीय बंटवारा राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया गया है।
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर फोकस
विकास योजनाओं को तेजी से लागू करने की रणनीति
क्या होगा असर?
इस नए बंटवारे से सरकार की कार्यशैली में बेहतर समन्वय और जवाबदेही आने की उम्मीद है।
👉 योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन
👉 विभागों के बीच बेहतर तालमेल
👉 शासन में पारदर्शिता और नियंत्रण मजबूत
धामी सरकार का यह नया विभागीय बंटवारा प्रशासन को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा अहम विभाग अपने पास रखना जहां रणनीतिक फैसला है, वहीं अन्य मंत्रियों को जिम्मेदारी देकर कार्यों का बेहतर वितरण सुनिश्चित किया गया है।


