देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में 9 और 10 अगस्त 2026 के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के बीच अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग भी अलर्ट मोड पर आ गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़कें बंद होने का खतरा बढ़ गया है, जबकि मैदानी इलाकों में जलभराव और बिजली-पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
9 अगस्त: इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में कुछ जगहों पर तेज गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने की भी चेतावनी दी गई है।
इन तीनों जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
9 अगस्त को टिहरी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और चंपावत जिलों में भी कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।
प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और नदी-नालों के पास न जाने की अपील की है।
10 अगस्त को और तेज हो सकता है बारिश का दौर
मौसम विभाग के अनुसार 10 अगस्त को भी बारिश का असर कम नहीं होगा। इस दिन देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
इन जिलों में कुछ स्थानों पर अत्यधिक तीव्र वर्षा और बिजली चमकने की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
10 अगस्त को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर जिलों में भी कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में मौसम की चुनौती बनी रहेगी।
11 अगस्त को भी जारी रहेगा बारिश का असर
मौसम विभाग ने 11 अगस्त के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दिन देहरादून, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना बनी हुई है।
हालांकि बारिश की तीव्रता 9 और 10 अगस्त की तुलना में कुछ कम रह सकती है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में खतरा बना रहेगा।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार तेज बारिश के कारण संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और चट्टान गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
संभावित प्रभाव:
- राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर मलबा आने से यातायात बाधित हो सकता है।
- बिजली और पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।
- निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग प्रभावित होने की आशंका है।
50 मिमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है बारिश की रफ्तार
मौसम विभाग के अनुसार कुछ स्थानों पर 20 से 30 मिलीमीटर प्रति घंटे की दर से वर्षा हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में यह रफ्तार 30 से 50 मिलीमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इतनी तीव्र बारिश कम समय में अचानक बाढ़ और फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। यात्रियों से कहा गया है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी ताजा अपडेट जरूर देखें।
विशेष रूप से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, पहाड़ी ढलानों और नदी किनारे के मार्गों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखने की तैयारी की गई है।
लगातार कई दिनों से हो रही बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी पहले से ही संतृप्त हो चुकी है। ऐसे में आने वाले दो दिनों में यदि तेज बारिश होती है, तो भूस्खलन, सड़क धंसने और नदी-नालों के उफान पर आने का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम चेतावनियों को गंभीरता से लें, अनावश्यक यात्रा से बचें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन तथा आपदा नियंत्रण कक्ष से तुरंत संपर्क करें।







