हरिद्वार: राजनीति चली दलितों के द्वार

कुमार दुष्यंत

” एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ एकजुट हुए दलितों के कारण इन दिनों राजनीति का पूूरा फोकस दलितों पर ही बना हुआ हैै। प्रत्येक दल दलित मतों को रिझाने में लगा हुआ हैै। हरिद्वार जनपद क्योंकि दलित बहुल हैै, इसलिए यहां भाजपा कांग्रेस में इन वोटों को रिझाने की होड़ लगी हुई है।”

हरिद्वार।  एससी/एसटी एक्ट में सर्वोच्च न्यायालय की पहल पर चल रही संशोधन की कवायद के खिलाफ पिछले दिनों हुए दलितों के उग्र आंदोलन ने सभी को चौंका दिया है। हजारों की संख्या में एकाएक सड़कों पर उतरे दलितों ने चुनाव के कगार पर खड़े हरिद्वार में राजनीतिक दलों को अपनी चुनावी रणनीतियों की समीक्षा के लिए मजबूर कर दिया है। हरिद्वार जनपद में दलित मतदाता बड़ी संख्या में हैं और यह हमेशा चुनाव को प्रभावित करते आए हैं। नतीजतन दलितों के प्रदर्शन के बाद से राजनीतिक दलों में  हरिद्वार में दलितों को रिझाने की होड़ लगी हुई। भाजपा और कांग्रेस में इन वोटों को रिझाने का आलम ये है कि पार्टी के नेता दलितों के घर-घर जाकर एक-दूसरे को कोस रहे हैं व स्वयं को दलितों का सच्चा हितैषी साबित करने में लगे हुए हैं।
हालात ये हैं कि दलितों के अधिकारों के समर्थन व उत्पीडन के खिलाफ जिले में रोज ही भाजपा व कांग्रेस के उपवास, धरने व प्रदर्शन हो रहे हैं। हरिद्वार के सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दलितों के समर्थन में एक दिन उपवास किया तो हरीश रावत जिले के दलित बहुल क्षेत्रों में जा-जाकर दलितों के यहां भोजन-भजन करने में लगे हुए हैं। वास्तव में यह सारी कवायद आसन्न चुनावों को देखते हुए दलितों को रिझाने के लिए की जा रही है।
हरिद्वार जिले में दलित मतदाता बहुसंख्यक है। सभी बड़े चुनावों में यह मतदाता ही निर्णायक रहता है। जिले के इक्तालीस फीसदी दलित  मतदाताओं के साथ इक्कतीस फीसदी अल्पसंखयक मिलकर परिणामों को एकतरफा कर देते हैं। जिले की ग्यारह में से दो हरिद्वार एवं रुड़की विधानसभा को छोड़ दें तो शेष सभी विधानसभाओं में जीत की कुंजी इन्हीं मतदाताओं के हाथ में है।
 जिले की भगवानपुर,  मंगलोर, झबरेड़ा , कलियर विधानसभाओं में दलित मतों का प्रतिशत जिले में दलितों के औसत से भी अधिक है दलित पिछड़ों व मुस्लिमों के बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों में होने के कारण हरिद्वार में जिला पंचायत चुनाव केवल इन्हीं मतदाताओं के गणित पर आधारित होते हैं। बड़े चुनाव में भी अभी तक यह मतदाता ही निर्णायक की भूमिका में बने रहे हैं हरिद्वार जिले के परिसीमन में आरंभ से ही दलितों पिछड़ों व मुस्लिम मतदाताओं की इस भूमिका ने ही यहां मायावती व रामविलास पासवान जैसे राष्ट्रीय दलित नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए आकर्षित किया है। जिले में क्योंकि शीघ्र ही निकाय चुनाव होने हैं। अगले वर्ष लोकसभा का रण होना है। जिसके लिए सूबे की राजनीति के नामचीन सतपाल महाराज, हरीश रावत, रमेश पोखरियाल निशंक व हरिद्वार से चार बार के विधायक मदन कौशिक की खास तैयारियां हैं। दलित आंदोलन के बाद जिले के दलितों को रिझाना बड़ी पार्टियों की इन्हीं तैयारियों का हिस्सा है।
हरिद्वार जिले का जातिगत विश्लेषण
स्वर्ण मतदाता         –      28 फीसदी
अनुसूचित जाति      –       22  फीसदी
ओबीसी                   –       19   फीसदी
मुस्लिम                   –       31  फीसदी

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