खुलासा: जनता दरबार में मीडिया पर प्रतिबंध। उत्तरा प्रकरण के आफ्टर इफेक्ट्स !

कृष्णा बिष्ट मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और 57 वर्षीय विधवा अध्यापिका के बीच हुए शर्मनाक विवाद की चौतरफा आलोचना से बौखलाई राज्य सरकार ने अब जनता दरबार हॉल में मीडिया और मोबाइल कैमरे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। अगला जनता दरबार 12 जुलाई को प्रस्तावित है। आशंका है कि यदि परिस्थिति सामान्य […]

कृष्णा बिष्ट
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और 57 वर्षीय विधवा अध्यापिका के बीच हुए शर्मनाक विवाद की चौतरफा आलोचना से बौखलाई राज्य सरकार ने अब जनता दरबार हॉल में मीडिया और मोबाइल कैमरे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। अगला जनता दरबार 12 जुलाई को प्रस्तावित है। आशंका है कि यदि परिस्थिति सामान्य नहीं हुई तो यह जनता दरबार टाला भी जा सकता है।
उत्तरा प्रकरण में मुख्यमंत्री के संयम खो देने के बाद हुए बवाल से यह उम्मीद जताई जा रही थी कि मुख्यमंत्री अपने व्यवहार में कुछ बदलाव लाएंगे। किंतु मीडिया कैमरे तथा मोबाइल पर प्रतिबंध यह संदेश जा रहा है कि मुख्यमंत्री अपनी कार्यशैली और व्यवहार में तो कोई अंतर नहीं लाएंगे, अलबत्ता उनका कोई अनुचित व्यवहार जनता में किरकिरी न करवा दे, इसलिए मीडिया और मोबाइल फोनों पर ही प्रतिबंध लगाया जा रहा है।
उत्तरा प्रकरण के बाद चौतरफा छीछालेदर से मुख्यमंत्री भी काफी असहज से हैं। यही कारण है कि 28 जुलाई से लेकर अब तक वह धूमाकोट बस हादसे के अलावा कहीं भी पब्लिक से रूबरू नहीं हुए हैं। धुमाकोट में भी उन्हें जनता के विरोध का सामना करना पड़ा था। मुख्यमंत्री का अधिकांश समय आवास पर ही गुजर रहा है, इसके अलावा वह इक्का-दुक्का हाई प्रोफाइल कार्यक्रमों में ही शामिल हुए हैं। जाहिर है कि उन्हें सहज होने में कुछ समय लग सकता है।
 मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर दर्शन सिंह रावत ने बताया कि मीडिया के साथ-साथ कोई भी राज्य सरकार का कर्मचारी आइंदा से जनता दरबार में नहीं आ सकेगा। कर्मचारी भी अब अपनी शिकायत सिर्फ अपने उच्चाधिकारियों तक ही बता सकते हैं।
 हालांकि इस मामले में अभी तक कोई  लिखित आदेश तो जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन दर्शन सिंह रावत ने कहा कि जल्दी ही नए प्रतिबंध सख्ती से लागू किए जाएंगे।
 गौरतलब है कि उत्तरा बहुगुणा प्रकरण को मीडिया  कर्मियों ने अपने कैमरों तथा मोबाइल में रिकॉर्ड करने के बाद पूरे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। मीडिया को प्रतिबंधित करने को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए सुभाष शर्मा ने कहा कि यह प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलने जैसा है।
 “आज मुख्यमंत्री जनता दरबार से मीडिया को दूर रख रहे हैं, कल वह अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी मीडिया की एंट्री बैन कर सकते हैं।”
 जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी कहते हैं कि यह कदम लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार के लिए उचित नहीं है। नेगी आशंका जताते हैं,- “इसी तरह का रवैया रहा तो कल के दिन सरकार कहीं आपदा आने पर अथवा अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी मीडिया की एंट्री प्रतिबंधित कर सकती है।”

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