खनन माफियाओं से की करोड़ों की डील: नेगी

परीक्षण की आड़ में 8 माह निलम्बित किया खनन कारोबार  परीक्षणीय कमेटी को एक माह का समय देकर किया 8 माह बाद आदेश निरस्त प्रदेश को लगी लगभग 250 करोड के राजस्व की चपत  अन्य प्रदेश के माफियाओं ने किया हजारों करोड़ का कारोबार  प्रदेश के खनन व्यवसायी एवं मजदूर रहे हाथ पर हाथ धरे […]

परीक्षण की आड़ में 8 माह निलम्बित किया खनन कारोबार
 परीक्षणीय कमेटी को एक माह का समय देकर किया 8 माह बाद आदेश निरस्त
प्रदेश को लगी लगभग 250 करोड के राजस्व की चपत
 अन्य प्रदेश के माफियाओं ने किया हजारों करोड़ का कारोबार
 प्रदेश के खनन व्यवसायी एवं मजदूर रहे हाथ पर हाथ धरे

देहरादून।  जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष एवं जनसंघर्ष मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि सूबे के मुख्यमन्त्री श्री त्रिवेन्द्र रावत जिनके पास खनिज मन्त्री का प्रभार भी है, ने मुख्यमन्त्री बनने के बाद मोटी रकम की व्यवस्था किये जाने की दिशा में सबसे पहले अन्य प्रदेश के खनन माफियाओं से सैकड़ों करोड की डील कर डाली, जिसके तहत सीएम (खनन मन्त्री) ने माह 9 मई 2017 को प्रदेश में हर प्रकार के खनन कारोंबार को निलम्बित (प्रतिबन्धित) कर दिया। श्री रावत ने सभी प्रकार के खनन पट्टों, हॉट मिक्स, स्क्रीनिंग प्लान्ट, भण्डारण, स्टोन क्रशर इत्यादि के लाइसेंसों को परीक्षण की आड में एक कमेटी के हवाले कर इनको निलम्बित कर दिया तथा निर्देश दिया कि कमेटी एक माह में अपनी रिपोर्ट सौंपे।


स्थानीय होटल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए नेगी ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि सरकार एक माह का समय देकर अपने आदेश (09.05.17) को भुला दिया गया, तथा 8 माह बाद प्रदेश को लुटाकर नया फरमान जारी किया कि जो खनन कारोबार पर परीक्षण हेतु रोक लगायी गयी थी वो माह 3 जनवरी 2018 कों बगैर परीक्षण कराये निरस्त कर दी गयी, यानि पट्टे चालू कर दिये गये। इन आठ महीनों तक सरकार ने परीक्षण की आड़ लेकर अन्य प्रदेश के खनन माफियाओं को लूट की खुली छूट दी, जिसके चलते खनन माफिया लगभग हजारों करोड़ का काला कारोबार करने में कामायाब हुए।
नेगी ने कहा कि इन आठ महीनों में सी0एम0 त्रिवेन्द्र ने अपनी कमाई के चक्कर में प्रदेश को लगभग 250 करोड़ राजस्व की चपत लगायी तथा इस रोक के चलते प्रदेश के खनन व्यवसायी एवं लाखों मजदूर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। इन आठ महीनों में जनता इन माफियाओं के हाथों लुटती रही। प्रदेश में राजस्व इकट्ठा न होने के कारण प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को कई-कई माह का वेतन नहीं मिल सका।


नेगी ने कहा कि सीएम त्रिवेन्द्र ने दो तरीके से काली कमाई का रास्ता अख्तियार किया, जिसमें एक तो अन्य प्रदेश के माफियाओं को खुली छूट देकर तथा प्रदेश के खनन लाइसेंसियों से परीक्षणीय आदेश निरस्त करने की एवज में मोटी रकम वसूलकर। जनसंघर्ष मोर्चा मुख्यमन्त्री की खनन माफियाओं से सांठगांठ को लेकर आखिरी दम तक लड़ेगा।
पत्रकार वार्ता में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, दिलबाग सिंह, बागेश पुरोहित, नवीन नेगी, मनीष ब्यास, अरविन्द बिष्ट आदि थे।

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