जीरो टोलरेंस पर सबसे बड़ा सवाल, भ्रष्टाचार के सीधे आरोप

लोक निर्माण विभाग के टेंडरों में हुआ करोड़ों का घोटाला

जो डबल इंजन सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की बात कह रही थी, वह अपने ही बनाए जाल में कुछ इस तरह फंस गई, देखिए उदाहरण-
अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड, लो.नि.वि. देहरादून द्वारा 7 जुलाई, 2017 को विधानसभा विकासनगर में विभिन्न कार्यों हेतु निविदा सूचना के प्रकाशन हेतु विभाग के महानिदेशक को पत्र लिखा गया।
उपरोक्त पत्र के क्रम में 11 जुलाई को एक दैनिक अखबार में निविदा प्रकाशित करने का खेल खेला गया। जिसमें उक्त समाचार पत्र के एक ही तिथि के देहरादून संस्करण की दो प्रतियों में भिन्नता पाई गई। एक प्रति में निविदा प्रकाशित की गई तथा अन्य दूसरी प्रतियों में निविदा नही छापी गई। ऐसा कुछ बेहद ख़ास लोगों/ ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की नीयत से किया गया।

इस विषयक मुख्य सूचना आयुक्त की जांच रिपोर्ट, जिसकी प्रतिलिपि मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार को की गई है, के अनुसार एक ही तिथि के एक ही संस्करण की दो प्रतियों में भिन्नता के पीछे आपराधिक षड्यंत्र की आशंका। प्रकाशन कुछ इस तरह से किया गया कि कुछ ख़ास लोगों तक ही सूचना पहुंचे, जन सामान्य से सूचना को छिपाने का कुचक्र रचा गया। निविदाओं के आवंटन में आपराधिक सांठ-गांठ की संभावना व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव से आवश्यक कार्यवाही का अनुरोध किया गया।
निविदा प्रकाशन का पत्र- 07/07/17
समाचार पत्र की दोनों प्रतियां- 11/07/17
मुख्य सूचना आयुक्त की रिपोर्ट- 08/02/18

 

 

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