यूपी के प्राइवेट सवारी वाहन बन रहे प्रशासन के लिए सर दर्द!नहीं कर रहे गाइडलाइन का पालन

उत्तराखंड, ऊ. सि. नगर रिपोर्ट/किच्छा, दिलीप अरोड़ा  पिछले काफ़ी समय से यूपी से प्राइवेट सवारी वाहनों मे मैक्स वाले प्रशासन के लिए सर दर्द बन गए है।पिछले कुछ समय को छोड़े तो वर्तमान मे जो मौजूदा वक़्त है वो एक गंभीर महामारी का वक्त है और इसके लिए सीएम ने भी एक कड़ी गाइड लाइन […]

उत्तराखंड, ऊ. सि. नगर

रिपोर्ट/किच्छा, दिलीप अरोड़ा 

पिछले काफ़ी समय से यूपी से प्राइवेट सवारी वाहनों मे मैक्स वाले प्रशासन के लिए सर दर्द बन गए है।पिछले कुछ समय को छोड़े तो वर्तमान मे जो मौजूदा वक़्त है वो एक गंभीर महामारी का वक्त है और इसके लिए सीएम ने भी एक कड़ी गाइड लाइन लागू कर रखी है|

गाइडलाइन का पालन करवाने के लिए प्रशासन को जिम्मेदारी दी गयी है।लेकिन प्रशासन इन पर कार्यवाही के नाम पर आँखे बंद करके बैठा है।

हैरानी की बात यह है कि, मौजूदा गाइडलाइन के अनुसार किसी भी प्राइवेट सवारी वाहन में  सवारी  50% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। और यूपी से आने वालों का स्मार्ट सिटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य है|  बावजूद इसके यह लोग गैर कानूनी रूप से खुद के साथ सवारीयों की भी जिंदगी को खतरे में डाल रहे है।

यही नहीं इसमें कुछ मैक्स ऐसी है जिन पर प्रेस लिखा होता है और यह मैक्स किच्छा बस स्टेशन के बाहर से सवारी बैठाकर पुलभट्टा थाना के पास से होते हुए यूपी पहुंच जाते है।

ऐसे ही यह लोग यूपी से वापिस किच्छा आते है।यदि इनकी वजह से कोई भी जान माल की हानि होती है या मौजूदा हालात और बिगड़ते है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।

इस पर एसडीएम नरेश दुर्गापाल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसको रोकने की पूरी जिम्मेदारी पुलिस की है और जो नियम है वो सबके लिए एक बराबर है और यह पूरी तरह से गलत हो रहा है मै इसको अपने हिसाब से देखता हूं।

अब देखना होगा कि, इस पर प्रशासन कब सख्त कार्यवाही करता है या फिर यूपी से किच्छा तक यह मौत का सफर यूँ ही चलता रहता है।

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