गंभीर आरोपों में घिरे आरवीएस रावत को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बनाया सलाहकार!

आरबीएस रावत पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षाओं घालमेल के गंभीर आरोप लगे एवं इसके बाद उन्होंने इस्तीफा भी दिया परन्तु जांच अभी विचाराधीन है।

मुख्यमंत्री जी ने आर .वी. एस रावत को प्रमुख सलाहकार के पद पर नियुक्त किया है! जिस पर बवाल बढ़ता ही जा रहा हैं।

जानिए क्या है पूरा मामला:

मामला ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के 298 पदों की परीक्षा में धांधली से जुड़ा है।2016 में  आयोजित की गई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में अनेक चमत्कार देखने को मिले ।

आपको बता दें कि, भर्ती परीक्षा में एक ही गांव के 22 अभ्यर्थी चयनित हुए एवं एक ही परिवार के अन्य सदस्य का चयन भी भर्ती परीक्षा में हुआ।

ये अभ्यर्थी भर्ती परीक्षा में टॉपर थे।जब परीक्षार्थियों का अन्य परीक्षा का रिकॉर्ड निकाला गया तो पाया गया कि इनके नंबर बहुत सामान्य नंबर से भी कम है।

आपको बता दें कि, उधमसिंह नगर के पास के अकेले महुवा डाबरा गांव से 22 युवाओं का चयन हुआ।अभ्यर्थियों ने परीक्षा में घालमेल का आरोप लगाते प्रदेश में व्यापक स्तर पर आंदोलन किए। जिसके परिणाम स्वरूप सरकार ने दबाव में आकर एक जांच कमेटी गठित की।

मामला बढ़ता देख राज्यपाल ने कार्मिक विभाग से रिपोर्ट तलब की तो, कार्मिक विभाग ने सब ठीक है करके रिपोर्ट भेजी और तत्कालीन राज्यपाल ने रिपोर्ट देख करके फाइल वापस भेज दी लेकिन विपक्ष का दबाव बढ़ रहा था तो तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जाँच बैठा दी।

छात्रों के उग्र आंदोलन एवं जांच की गहनत के मध्य नजर आरबीएस रावत ने चेयरमैन के पद से इस्तीफ़ा दिया। इसमें भी खास बात यह रही कि, तत्कालीन सरकार ने छह महीने बाद सितम्बर 2016 में इस्तीफा स्वीकार किया।इस्तीफा स्वीकृत होने पर सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए।

जांच समिति ने ओएमआर शीट मंगवाकर देखी और पाया कॉपियों में टेम्परिंग की गयी है। समिति ने यह भी सिफारिश की कि, परीक्षा रद्द करके नए सिरे से करायी जाये ।

इसी बीच आयोग के नए चेयरमैन के पद पर अपर मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए एस राजू को नियुक्त कर दिया गया। राजू ने फॉरेंसिक जाँच की सिफारिश भी की और जब लखनऊ से जांच होकर रिपोर्ट आई तो उसमें साफ़ उल्लेख था कि, धांधली हुई है, मसलन :- सुनियोजित तरीके से ओएमआर शीट खाली छुड़वा दी गयी, टेम्परिंग की गयी इत्यादि।

विपक्ष ने जब इस मामले को लेकर हंगामा जारी रखा तो तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने सदन में जांच का प्रस्ताव रखा।

जांच अभी भी विचाराधीन है। जांच अधिकारी इस जांच पर कुंडली मारे बैठे हैं।कुल मिलाकर आरवीएस रावत की  टीम तीरथ में एंट्री जनता को बिल्कुल भी रास नहीं आ रही है।

देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि, क्या यह खिलाड़ी टीम तीरथ में बने रहेंगे या फिर हिट विकेट होकर पवेलियन वापस लौट जाएंगे।

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