निगम के गले की हड्डी बना शैलजा फार्म अतिक्रमण प्रकरण,अतिक्रमणकारियों को बचा रहा निगम

अश्विनी सक्सेना।

रुद्रपर

पर्वतजन ने कुछ ही समय पहले नगर निगम रुद्रपुर के शैलजा फार्म की लगभग 10 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण की रिपोर्ट प्रकाशित की थी । जिस पर उक्त में शामिल विकास शर्मा द्वारा वीडियो के माध्यम से अपनी सफाई देते हुए  कर्मचारियों को एक बोतल शराब और कुछ पैसों में बिकते हुए बताया गया था। 

उनकी बात में दम भी लगता है शायद उन्होंने इसका अनुभव भी किया होगा ।जो सत्य ही होगा इसीलिए इस बात को उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा है।  हमारी खबर के बाद उक्त मुद्दा चर्चित ही नहीं बल्कि रुद्रपुर की राजनीति में बहुत गर्म हो गया है।

यहां आपको बता दे कि, मेयर राम पाल जी स्वयं भी इस अतिक्रमण को खुले आम बढ़ावा दे रहे हैं ।मेयर द्वारा अपने वाहन चालक को भी इसी भूमि पर अतिक्रमण कर घर बनाने के मौखिक आदेश दे वहां रहने को कहा गया और  उनका वाहन चालक वहां निवास भी कर रहा है। जिसके प्रमाण पर्वतजन के पास मौजूद हैं।  दूसरी ओर विकास शर्मा उनके नजदीकी मित्रो में शुमार है।

चर्चित शैलजा फार्म  के अवैध रूप से अतिक्रमण का मुद्दा नगर निगम रुद्रपुर प्रशासन के लिए गले की फ़ांस  बना हुआ है ।

दिनांक 24/04 /2021 को निगम द्वारा कुछ लोगो को नोटिस दिया गया कि 3 दिन के भीतर अतिक्रमण स्वयं हटा लें अन्यथा ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी।

नोटिस के बाद भी आज तक निगम द्वारा उक्तों के विरुद्ध कोई कार्यवाही न करना तथा आरटीआई  में पूछे गये प्रश्न पर यह जबाब कि कोविड के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही नहीं की गई, निगम की महानगर अधिकारी की इस अतिक्रमण को मोन स्वीकृति को उजागर करता है, क्योंकि इसी कोविड काल मे निगम द्वारा एक ही सप्ताह में दो स्थानों ट्रांजिट केम्प तथा हरि मन्दिर गली  से jcb द्वारा स्वयं उपस्थित रह कर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की गई।

हालांकि, हरि मन्दिर पर जनता/व्यापारियों  के विरोध के कारण कार्यवाही नहीं हो सकी।  यहां यह बात तो स्वयं सिद्ध  हो जाती है कि, नगर आयुक्त का भी इस अतिक्रमण में पूर्ण सहयोग है,  क्योंकि न तो अतिक्रमण कारियों ने आज तक अपने पक्ष के कोई अभिलेख निगम को दिखाए ओर न ही सार्वजनिक किये, फिर भी निगम मौन है।  

नोटिस बाजी करना बस नगर निगम प्रशाशन का मात्र दिखावा था।  अतिक्रमण कारियों में कुछ लोग सत्ता पक्ष से गहरे सम्बन्ध रखते है, इसीलिए इस चर्चित विषय को ठंडे बस्ते में डाल दिया गयां है।

इस विषय में अतिक्रमण कारी विकास शर्मा का कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो आया जिसमे उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया गया कि जमीन पर जो निर्माण किया गया है, वह निर्माण कॉलोनी वासियो के कहने पर किया गया है  और निर्माण कर्त्ता  बालाजी सेवा समिति है, जिसमें विकास शर्मा भी पदाधिकारी है।

वही विकास शर्मा ने इस अतिक्रमण को देव भूमि व्यापर मण्डल से भी जोड़ने के प्रयास किये।जिस पर उनके द्वारा उक्त के लेटर पेड पर निगम को एक पत्र भी लिखा गया किन्तु इतना घटना क्रम होने के बावजूद भी किसी व्यक्ति या कॉलोनी वासियो द्वारा या समिति द्वारा रजिस्ट्री को नगर निगम या जनता के बीच सार्वजनिक नहीं किया गया।

इससे यह सिद्ध हो जाता है कि, निर्माण कर्ताओ के पास भूमि के मालिकाना हक के कोई दस्तावेज नहीं है।

 आपको बताते चलें कि, इस 7:30 एकड़ भूमि पर वर्तमान में मेयर रामपाल ने अपने निगम कर्मचारी का यहां  पर घर बनवाया हैं । 

सबसे बड़ा सवाल यह उठता  है कि, क्या मेयर किसी निगम के कर्मचारी को सरकारी भूमि पर किसी अपने ही विभाग के ड्राइवर को रहने की अनुमति कैसे दे सकता है ?

 नगर निगम द्वारा अवैध अतिक्रमण को चिन्हित भी कर लिया गया है ।उसके बावजूद भी मेयर के दबाव में नगर निगम प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं करना बड़ा सवाल खड़ा करता है ।

क्या सत्ता पक्ष में रहने के बाद नेता मनमाने तरीके से अपने करीबियों को ऐसे ही लाभ पहुंचते रहेंगे,ओर निगम की करोड़ों रुपये की भूमि पर मन्दिर,कालोनी,ओर स्कूल बनवा कर खुर्द बुर्द करते रहेंगे।

आज लगभग ढाई महीना होने के बाद भी अतिक्रमणकारियों  के खिलाफ कारवाही न करना,मोन रहना, नगर निगम के प्रशासन को भी सवालों के घेरे में खडा करता है।इस भूमि पर बीसियों परिवार घर बना कर निवास कर रहे हैं लेकिन कोई नहीं बोलता केवल विकास शर्मा ही वीडियो डाल कर सफाई देते हैं।

इससे यह भी प्रतीत होता है कि, मेयर के खास होने के कारण उक्त भूमि पर हो रहे अतिक्रमण,अवैध निर्माण की कमान उन्होंने ही सँभाल रखी है।

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