कर्णप्रयाग नगर में अव्यवस्थित दुकानों से परेशान जनता।

सतीश डिमरी               कर्णप्रयाग नगर अपने आप में एक धार्मिक नगरी है। यह नगर यात्रा मार्ग का नगर भी है। नगर में    अव्यवस्थाओं का अंबार दिखता है, अव्यस्थाओं के अंबार में मीट/मांस की दुकानें भी हैं।  नियमानुसार मीट की दुकानें अलग से होनी चाहिए, जहां की जनता का आवाजाही न हो, पर्यावरण दूषित न, नदी […]

सतीश डिमरी

              कर्णप्रयाग नगर अपने आप में एक धार्मिक नगरी है। यह नगर यात्रा मार्ग का नगर भी है। नगर में    अव्यवस्थाओं का अंबार दिखता है, अव्यस्थाओं के अंबार में मीट/मांस की दुकानें भी हैं।

 नियमानुसार मीट की दुकानें अलग से होनी चाहिए, जहां की जनता का आवाजाही न हो, पर्यावरण दूषित न, नदी नाले दूषित न हो, इन सबका ध्यान रखा जाना अनिवार्य है।

 एक तरफ केंद्र सरकार स्वच्छता अभियान के तहत नमामि गंगे अभियान चला रही है, वहीं करनप्रयाग नगरी के मुख्य बाजार से उपर की ओर देखे तो वहीं पर सामान्य दुकानों के साथ मीट की दुकानें भी देखी जा सकती है। 

यह रास्ता मंदिर आदि के लिए भी जाता है। व्रत आदि के दिन जनता खासे परेशान दिखती है। 

नगर पालिका करन प्रयाग को भी जनता द्वारा कई बार इस सम्बन्ध में अवगत कराया गया है, लेकिन नगर पालिका द्वारा भी जनता का ध्यान न रखा गया, जिससे कि उचित कार्यवाही कर मीट की दुकानों के लिए अलग स्थान चयनित कर आम रास्ता से दूर रखा जाए, जिससे कि पर्यावरण पर विपरीत असर ना पड़े।

 साथ ही आम मार्केट में  स्वच्छता बनी रहे। जनता को आशा है, कि नगर पालिका उनका रख कर दुकानों के लिए उचित व्यवस्था करेगी।   

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