वायरल वीडियो : एक भर्ती प्रक्रिया ने खोली प्रशासन की पोल..

कुमाऊं ब्यूरो विशाल सक्सेना भर्ती में आए युवाओं की एक वायरल वीडियो से प्रशासन और व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। आर्मी भर्ती के लिए उत्तराखंड में अन्य राज्यों के अलावा यूपी के विभिन्न जिलों से आए युवाओं को पिथौरागढ़ भेजने में प्रशासन पूरी तरह से नाकाम रहा। रोडवेज बस स्टेशन पर युवाओं को […]

कुमाऊं ब्यूरो विशाल सक्सेना

भर्ती में आए युवाओं की एक वायरल वीडियो से प्रशासन और व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। आर्मी भर्ती के लिए उत्तराखंड में अन्य राज्यों के अलावा यूपी के विभिन्न जिलों से आए युवाओं को पिथौरागढ़ भेजने में प्रशासन पूरी तरह से नाकाम रहा।

रोडवेज बस स्टेशन पर युवाओं को पर्याप्त ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं मिली, विभाग की मशक्कत के बाद निजी और स्कूल बसों के जरिए युवाओं को पिथौरागढ़ भेजा गया।

हालात इतने खराब थे कि कुछ युवाओं को अपनी जान जोखिम में डालते हुए रोडवेज बस की डिग्गी में सफर करना पड़ा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और विभाग की पोल खोल दी।

टनकपुर का ये वायरल वीडियो इस बात का गवाह है कि किस तरह प्रशासनिक लापरवाही के चलते सेना में भर्ती के इच्छुक युवाओं को असहनीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

टेरिटोरियल आर्मी (टीए) की भर्ती प्रक्रिया में बेरोजगार युवाओं की उमड़ी भीड़ ने पिथौरागढ़ और आसपास के शहरों में पूरी व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया।

बसों की भारी कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण हल्द्वानी से भी पिथौरागढ़ तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

हजारों युवा भर्ती के लिए ट्रेन से हल्द्वानी पहुंचे, लेकिन पिथौरागढ़ जाने के लिए बसों का नदारद होना समस्याओं का कारण बना।

रोडवेज बस स्टैंड पर सुबह से ही हज़ारों युवाओं की भीड़ जमा हो गई थी, कई युवा बसों के बोनट और छतों पर चढ़ गए और दोनों गेटों के बाहर जाम लग गया।

बसों और टैक्सियों के लिए झगड़े की स्थिति बनने पर तिकोनिया में पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, लेकिन हालातों पर काबू नहीं पाया जा सका, प्रशासन की सुस्ती के कारण युवा ठंड में स्कूलों के फर्श पर रात बिताने को हुए मजबूर।

हल्द्वानी की सड़कों पर भर्ती में शामिल युवाओं की भीड़ ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया, कई घंटे तक गाड़ियां जाम में फंसी रही।

रोडवेज विभाग ने 94 बसों और 67 टैक्सियों की व्यवस्था करने का दावा किया, लेकिन यह भी नाकामी साबित हुई, भीड़ के सामने पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से बेबस नजर आया, भीड़ नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि इस भर्ती ने बेरोजगारी और प्रशासनिक खामियों की सच्चाई को उजागर किया है।

 

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