आखिर क्यों धरने पर बैठने को मजबूर हुए वन मंत्री के पूर्व प्रेस सचिव

इंद्रजीत असवाल

विगत एक महीने से चल रहे वन मंत्री और उनके पूर्व प्रेस सचिव और कोविड प्रतिनिधि बेस हॉस्पिटल कोटद्वार सुधीर बहुगुणा के बीच का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है ।

सुधीर ने अपनी मांग को लेकर कोटद्वार में भाजपा कैंप कार्यालय, महिला उत्थान एवं बाल कल्याण संस्था के ऑफिस एवं वन मंत्री के आवास ऑफिस में सांकेतिक धरना दिया ।

उन्होंने मांग की कि, मंत्री जी उनका विगत साढ़े चार साल का हिसाब जो कि विभिन्न कार्यक्रमों की पेमेंट तथा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत जी के स्वागत तथा प्रचार का खर्चा तथा अनुकृति गुसाईं द्वारा महिला उत्थान के दो कार्यक्रम के मोटाढाक तथा जी के फार्म कोटद्वार की लगभग चार लाख चालीस हजार की पेमेंट व हाल ही में कोविड-नाइंटीन के तहत बांटी गई।

कोविड किट तथा अन्य सामग्री का हिसाब सहित अपने सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक लाख कलाकारों तथा दो लाख संस्था के सांस्कृतिक आयोजन के लिए की गई। घोषणा के भुगतान की मांग जो कि, लगभग बारह लाख का हिसाब तथा इसके अतिरिक्त लालढांग चिल्लरखाल मार्ग तथा सनेह की दीवाल के लिए बाजार के दुकानदारो से उधार दिलाई गई।

लगभग तीस लाख के सरिया सीमेंट की पेमेंट भी शीघ्र करने की मांग की । ऐसा न करने पर उन्होंने जल्दी ही एक हफ्ते बाद बच्चों सहित विधिवत देहरादून व कोटद्वार में अनशन करने की चेतावनी दी ।

उन्होने कहा कि, नेता को अपने कार्यकर्ताओं को इस तरह का आचरण नहीं करना चाहिये ।सुधीर ने कहा उनके दो साल से सांस्कृतिक कार्यक्रम व अन्य काम बन्द है ,जिस कारण घर का खर्चा तथा उक्त देन दारी से वो परेशान है।

उन्होने कहा कि, तीन सालो से कई मर्तवा सामने तथा फोन पर बात व मैसेज भेज कर मंत्री तथा उनकी बहू से यह हिसाब करने को कहा परंतु दोनो ही इसे टालते रहे व मजाकिया तरीके से उन्हे संत्वना देते रहे जिस कारण उन्हे यह करना पड़ा । 

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