बदहाल पैदल रास्तों और खराब मौसम के चलते मोरी अस्पताल नहीं पहुंच सकी अमीना, हेली सेवा भी नहीं भर सकी उड़ान

मोरी। 22 अगस्त 2026/नीरज उत्तराखंडी  दूरस्थ मोरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच न हो पाने का एक और दर्दनाक मामला सामने आया है। ओसला गांव में प्रसव के बाद गंभीर हुई 26 वर्षीय अमीना पत्नी शंकर दास उर्फ बबलू दास की रास्ते में मौत हो गई। प्रसव के दौरान ही उसके नवजात […]

मोरी। 22 अगस्त 2026/नीरज उत्तराखंडी 
दूरस्थ मोरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच न हो पाने का एक और दर्दनाक मामला सामने आया है। ओसला गांव में प्रसव के बाद गंभीर हुई 26 वर्षीय अमीना पत्नी शंकर दास उर्फ बबलू दास की रास्ते में मौत हो गई।

प्रसव के दौरान ही उसके नवजात बच्चे की भी मौत हो गई। महिला को क्षतिग्रस्त सड़कों और बदहाल पैदल मार्गों के कारण डंडी के सहारे अस्पताल लाया जा रहा था। गंभीर हालत में मोरी पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। खराब मौसम के कारण हेली सेवा भी उपलब्ध नहीं हो सकी।

जानकारी के अनुसार,अमीना का मायका ओसला और ससुराल गंगाड़ गांव में है। शुक्रवार सुबह उसने मायके में ही बच्चे को जन्म दिया। प्रसव सातवें महीने में समय से करीब दो माह पहले हो गया। प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई, जबकि अमीना की हालत भी गंभीर हो गई।

परिजन और ग्रामीण उसे उपचार के लिए मोरी अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन बारिश के कारण पैदल रास्तों की स्थिति बेहद खराब थी। उसे डंडी के सहारे दुर्गम पहाड़ी रास्ते से लाया जा रहा था। रास्ते में उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और मोरी पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

हेली सेवा भी मौसम की भेंट चढ़ी

प्रसूता अमीना को ओसला से तथा सटूड़ी निवासी मैमर सिंह को पुरोला से अस्पताल पहुंचाने के लिए हेली सेवा की व्यवस्था की गई थी। लेकिन खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका। इससे दोनों मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाया। मैमर सिंह को भी ओसला से पैदल सड़क तक लाया गया, जिसके बाद परिजन उन्हें कार से देहरादून ले जा रहे थे। रास्ते में उनकी भी मौत हो गई।

अस्पताल में पंजीकरण था

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी के प्रभारी चिकित्सक डॉ. नितेश रावत ने बताया कि अमीना का स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण था और उसे सभी आवश्यक टीके लगाए गए थे। चिकित्सक के अनुसार प्रसव समय से पहले सातवें महीने में हो गया था।

बदहाल रास्ते बन रहे जानलेवा

ओसला के प्रधान बृजमोहन ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क और पैदल रास्तों की स्थिति लंबे समय से खराब है। बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं। गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी समय लग जाता है, जिससे कई बार उनकी जान पर बन आती है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

अमीना का विवाह करीब एक वर्ष पूर्व ही हुआ था। एक ओर नवजात की मौत और दूसरी ओर प्रसूता की जान जाने से परिवार और ग्रामीणों में शोक की लहर है। यह घटना मोरी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, पैदल मार्ग और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

Also Read This

ब्रेकिंग: पूर्व IAS बने उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग के आयुक्त

देहरादून: उत्तराखंड प्रशासनिक सेवा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व आईएएस अधिकारी दीपेंद्र चौधरी को उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग का आयुक्त...

एसआईआर: 11.90 लाख मतदाताओं की मैपिंग पूरी। 5.47 लाख नोटिस जारी, 3.95 लाख की सुनवाई संपन्न

देहरादून, 21 अगस्त। नीरज उत्तराखंडी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत देहरादून जिले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम तेजी से आगे बढ़...
Parvatjan Team
Parvatjan Team
Parvatjan Team is dedicated to delivering the latest, accurate, and reliable news from Uttarakhand. We cover local issues, administrative updates, public interest stories, and breaking news in a clear and simple manner.

Related Posts