देहरादून में बिल्डर की गुंडागर्दी: निवासी समिति अध्यक्ष से अभद्रता पर एफआईआर

  देहरादून। सहस्रधारा रोड स्थित प्रतिष्ठित एटीएस सोसाइटी में शुक्रवार देर रात्रि हुई एक घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। आरोप है कि बिल्डर पुनीत अग्रवाल ने सोसाइटी के निवासी समिति अध्यक्ष अजय सिंह का रास्ता रोककर उन पर हमला किया और अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया। इस घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी सामने […]

 

देहरादून। सहस्रधारा रोड स्थित प्रतिष्ठित एटीएस सोसाइटी में शुक्रवार देर रात्रि हुई एक घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। आरोप है कि बिल्डर पुनीत अग्रवाल ने सोसाइटी के निवासी समिति अध्यक्ष अजय सिंह का रास्ता रोककर उन पर हमला किया और अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया। इस घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही है।

 

घटना के दौरान अजय सिंह की गाड़ी को ईंटों से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य निवासियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। जब स्थानीय लोगों ने पुलिस हेल्पलाइन 112 पर सूचना दी, तो मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़ित पक्ष को ही धमकियां दीं, जिससे क्षेत्रवासियों में आक्रोश फैल गया। इस व्यवहार ने पुलिस की ‘मित्र पुलिस’ की छवि पर सवाल खड़े कर दिए।

 

वीडियो वायरल होने और निवासियों के विरोध के बाद शनिवार को सोसाइटी के लोगों ने पुलिस मुख्यालय जाकर वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने मामले का संज्ञान लिया और रायपुर थाने को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देशों के अनुपालन में बिल्डर पुनीत अग्रवाल और उनके एक साथी के खिलाफ रायपुर पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

 

ज्ञात हो कि पुनीत अग्रवाल पूर्व में भी विवादों में रहे हैं। दीपावली के दौरान पटाखे जलाने को लेकर बच्चों के साथ विवाद में उन्होंने कथित तौर पर पिस्टल लहराई थी, जिसके बाद देहरादून जिलाधिकारी ने उनका शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर हथियार जब्त करने के आदेश दिए थे। इसके अलावा, उन्होंने नगर निगम की भूमि पर कब्जा किया था, जिसे शिकायतों के बाद निगम ने मुक्त कराया। वर्तमान में उनका एक अवैध निर्माण का मामला मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में विचाराधीन है।

 

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस आगे क्या कदम उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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