त्रिवेंद्र जी सुनो ! ओमप्रकाश जी को ही सीएम क्यों नही बना देते !

दीपक फर्सवाण 

1- जबकि बद्रीनाथ धाम के कपाट ही नहीं खुले तो एसीएस ओमप्रकाश ने देहरादून समेत सम्बंधित जिलाधिकारियों को अपराधी पृष्ठभूमि के उत्तर प्रदेश के विधायक अमनमणि और उसके साथियों को बद्रीनाथ जाने की अनुमति देने के आदेश क्यों दिए ?

2- कोरोना महामारी के चलते बद्रीनाथ-केदारनाथ की यात्रा पर श्रद्धालुओं के जाने का प्रतिबंध है तो ओमप्रकाश ने यात्रा का पास जारी करने को क्यों कहा?

3- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तक लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए कपाट खुलने के मौके पर गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ जाने से परहेज़ किया तो ओमप्रकाश ने हत्या के आरोपी विधायक को इन पवित्र धामों में जाने देने की पैरवी क्यों की ?

4- क्या अमनमणि जैसा क्रिमिनल विधायक बद्रीनाथ धाम के रावल (मुख्य पुजारी) से बड़ा है ? रावल मौजूदा समय में ऋषिकेश में quarentine हैं, और ओमप्रकाश अपराधियों को कपाट बंदी में भी बद्रीनाथ भेजने के निर्देश दे रहे हैं ?

5- ओमप्रकाश को क्या ये जानकारी नहीं है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक सन्यासी हैं और एक सन्यासी का अपने पूर्वाश्रम के पिता के पितृ कार्य से कोई लेना-देना नहीं होता, ऐसे में एक निर्दलीय विधायक जिस पर कि अपनी पत्नी की हत्या का मुकदमा दर्ज है, वो कैसे योगी के पिता के पितृ कार्य का अधिकारी हो गया, जबकि योगी के सगे भाई उनके पैतृक घर में पिता के निधन के बाद सभी संस्कार विधिवत कर रहे हैं ?

6- कहा जाता है कि ओमप्रकाश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सबसे चहेते ऑफिसर रहे हैं, तो क्या वे मुख्यमंत्री से अपने मधुर रिश्ते और अपने पद व अधिकार का दुरुपयोग बाहुबली अमरमणि को उपकृत करने में कर रहे हैं?

7- क्या बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम जाने की नियम विरुद्ध स्वीकृति की पैरवी करके ओमप्रकाश ने देशव्यापी लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं करवाया ? क्या इसमें उत्तराखंड राज्य और त्रिवेन्द्र सरकार की देश और दुनिया में छवि खराब नहीं हुई ?

8- उत्तराखंड के सभी पहाड़ी जिले ग्रीन जोन में हैं, यदि उत्तर प्रदेश से आये विधायक अमनमणि और उनके साथियों से इन जिलों में कोरोना संक्रमण हुआ तो क्या इसकी जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश लेंगे ?

9- अमनमणि जैसे अपराधी पृष्ठभूमि के नेता से ऐसे क्या संबंध हैं कि ओमप्रकाश उत्तराखंड शासन के शीर्ष ऑफिसर होते हुए लॉकडाउन के सख्त नियमों और देश में लागू महामारी एक्ट के उल्लंघन करके अमरमणि को बद्रीनाथ-केदारनाथ जाने की अनुमति देने के आदेश जिलाधिकारी को दे रहे हैं ?

ओमप्रकाश के एक आदेश ने उड़ा दिया सब कुछ

उत्तराखण्ड सरकार के एक चर्चित नौकरशाह के पैरवी पत्र से उत्तराखण्ड के लॉकडाउन की धज्जियां उड़ा दी गई। उत्तर प्रदेश का एक दबंग विधायक अपने 8 साथियों के साथ बदरीनाथ-केदारनाथ की यात्रा पर निकल पड़ा। रास्ते में जहां-जहां पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने विधायक के काफिले को रोका, एसीएस के पत्र को देखते ही वे विधायक को सलाम ठोकर रास्ते देते चले गए। पांच जिलों की सीमा को क्रास करने के बाद छठे जिले में विधायक को रोका-टोका गया। कानून हवा में उड़ाकर कर्णप्रयाग पहुंचे इस विधायक को चमोली जिले के पुलिस प्रशासन ने भी सिर्फ हिदायत देकर लौटा दिया।


यूपी का विधायक अमनमणि त्रिपाठी पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरमणि त्रिपाठी का पुत्र है। पिता और पुत्र दोनों का ही अपराधिक इतिहास रहा है। ऐसे विधायक की पैरवी के लिये उत्तराखण्ड शासन के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बीते 2 मई को देहरादून समेत पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली के डीएम को एक पत्र जारी किया। पत्र में कहा गया कि यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाठी अपने 10 साथियों के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्वर्गीय पिता के पितृ कार्य के लिये बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम जायेंगे लिहाजा उन्हें अपने साथियों व वाहनों समेत आने-जाने की अनुमति प्रदान करने का कष्ट करें। इसी पत्र के बुते अमनमणि उत्तर प्रदेश से चमोली जिले के कर्णप्रयाग नगर तक पहुंच गया। कहा जा रहा है कि एक पुलिस कर्मी के साथ अमनमणि बहस न करते तो उन्हें वहां भी नहीं रोका जाता।


कार्रवाई बगैर क्यों छोड़ा ?

देहरादून। सवाल यह है कि चमोली की डीएम स्वाति भदौरिया के संज्ञान में मामला आने के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाकर कर्णप्रयाग पहुंचे अमनमणि को पुलिस ने बगैर किसी कार्रवाई के वापस लौटा दिया। जबकि विधायक पर लॉकडाउन और महामारी एक्ट के उल्लंघन का मुकदमा कायम किया जाना चाहिये था।

कवारेंटाइन करने की हिम्मत नहीं जुटा पाये

देहरादून। चमोली जिले के पुलिस प्रशासन के अधिकारी अमनमणि को क्वारेंटाइन करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाये। जबकि देहरादून व अन्य जिलों से चमोली जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जबरन गौचर में क्वारेंटाइन किया जा रहा है।

जवाब देने को तैयार नहीं ओमप्रकाश

देहरादून। इस सम्बंध में यह पूछने पर कि क्या अमनमणि के पास मिला पत्र एसीएस ओमप्रकाश ने जारी किया है, इसका जवाब देने से ओमप्रकाश कतरा रहे हैं। मोबाइल पर फोन करने पर उनके ओएसडी गुणवंत ने कहा कि साहब बिजी हैं।

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