कोरोना काल में खूब चल रहीं राजनीतिक पार्टियों की रसोइयां

देहरादून। कोरोना काल में विभिन्न राजनीतिक दलों की रसोईयों गरीबों और असहायों का पेट भर रही हैं। इससे उत्तराखंड में आजकल तीन राजनीतिक दल भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी चर्चा में बने हुए हैं।
पाठकों को बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी ने मोदी किचन नाम से गरीबों व लाचार खड़े लोगों के लिए मुहिम शुरू की हुई है। और भाजपा केे जनप्रतिनिधि इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और सुपर विजन भी कर रहे हैं। इसके तहत वह पके हुए भोजन के पैकेट और राशन उपलब्ध करवा रहे हैं।

कांग्रेस ने भी सोनिया रसोई नाम से गरीबों की सुध ली और वह इस रसोई से लॉकडाउन में खाने-पीने के लिए जूझ रहे लोगों के लिए पका हुआ भोजन और राशन मुहैया कराने में जुटे हुए हैं। देहरादून के विकास नगर में एक बार सोनिया रसोई को सोशल डिस्टेंसिंंग का  पालन न करने के नाम रोका गया किंतु बात बढने पर इसे फिर चालू करा दिया गया।
आम आदमी पार्टी की उत्तराखंड इकाई ने भी इस मुहिम को बेहतर मानते हुए ‘आम आदमी की रसोई’ नाम से अभियान शुरू  किया हुआय है।
आम आदमी पार्टी जिला देहरादून के पू. जिला मीडिया प्रभारी सुधीर कुमार पंत ने बताया कि आम आदमी पार्टी उत्तराखण्ड भी ‘आम आदमी की रसोई, के अंतर्गत यथाशक्ति ऐसे सभी जरूरतमंद लोगों के लिये पका भोजन और कच्चा राशन उपलब्ध करा रही है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल व अन्य जगहों पर आपसी सहयोग से ये कार्यक्रम चला रहे हैं।
आम आदमी पार्टी देहरादून में पके भोजन के साथ-साथ जगह जगह कच्चा राशन भी वितरित कर रही है। अब तक हजारों जरूरतमंदों को भोजन व कच्चा राशन वितरित किया जा चुका है।

इसी के तहत राशन वितरण कार्यक्रम मेहुंवाला में माउंट लिटेरा स्कूल के पास आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं व स्थानीय प्रशासन के सहयोग से सम्पन्न हुआ, जिसमें लगभग 100 से भी ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को कच्चा राशन वितरित किया गया।
इस अवसर पर नवीन पिरशाली, राव नसीम अहमद, अशोक सेमवाल, श्यामलाल नाथ, वीरेंद्र पोखरियाल आदि उपस्थित रहे।
आम आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ कार्यकत्री उमा सिसोदिया तो लॉक डाउन के बाद से ही अपने घर से प्रतिदिन 200 लोगों की रसोई तैयार कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि देश पर आये वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संकट और अचानक देशव्यापी लॉकडाउन के चलते प्रदेश में जगह जगह लोग परेशान हैं। खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरी, रोज कमाने-खाने और निम्न आय वर्ग वाली आम जनता पर इसका खासा असर दिखायी पड़ रहा है। ऐसे में अपनी अपनी क्षमतानुसार समाज का हर वर्ग इन जरूरतमंदों की भूख मिटाने व मदद करने का कार्य कर रहा है।

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