सरकार की उदासीनता के कारण उफनती नदी में जान हथेली पर रख ग्रामीण आवाजाही को मजबूर

सरकार की उदासीनता के कारण उफनती नदी में जान हथेली पर रख ग्रामीण आवाजाही को मजबूर

रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
देवाल। उत्तराखंड राज्य के गठन को 20 वर्ष हो गए है। लेकिन इस युवा उत्तराखंड में कितना विकास हुआ ये समझने के लिए काफी है। इन तस्वीरों को देखना ये तस्वीरें चमोली जिले के देवाल विकासखण्ड के ओडर गांव की है। जहां ग्रामीण 2013 की आपदा में बहे पुल की मांग अब तक कर रहे हैं। लेकिन अफसोस पिछले सात सालों में इस पुल का निर्माण तो न हो सका, लेकिन हर साल बरसात खत्म होते हो ग्रामीण अपने संसाधनों से खुद लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर जान जोखिम में डालकर आवाजाही को मजबूर हैं। बरसात के समय थराली का लोक निर्माण विभाग इन ग्रामीणों की सहूलियत के लिए ट्रॉली का विकल्प जरूर देता है। लेकिन बरसात खत्म होते ही ट्रॉली बन्द हो जाती है और यहां के ग्रामीण खुद मेहनत मशक्कत के बाद लकड़ियां डालकर उफनती पिण्डर नदी पर वैकल्पिक पुल का निर्माण करते हैं।

दरसल 2013 की आपदा में पिण्डर क्षेत्र में अधिकांश पुल आपदा की भेंट चढ़ गए थे, जिनमें से अधिकांश बन भी चुके हैं। लेकिन अब भी कई गांव ऐसे हैं जिनके आवागमन का एकमात्र साधन अब भी नही बन सका है। ऐसे में ग्रामीण सरकारों से गुहार लगाकर थक चुके हैं। लेकिन अफसोस ये तस्वीरे न तो हुक्मरानों को नींद से जगा पाती हैं और न ही आपदा के जख्म भर पाती हैं। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि, उनकी खेती, बाजार, सरकारी दफ्तर सब पिण्डर नदी के इस पार हैं। जबकि गांव नदी के उस पार रोजाना रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उफनती पिण्डर नदी को पार करना होता है।

लोक निर्माण विभाग बरसात खत्म होते ही ट्रॉली बन्द कर देता है। ऐसे में उफनती नदी को पार करने में जान का जोखिम ज्यादा होता है, या फिर कई किमी की पैदल अतिरिक्त दूरी तयकर ग्रामीण नदी के दूसरे किनारे तक पहुंच पाते हैं। इसलिए ग्रामीणों द्वारा बरसात खत्म होते ही लकड़ियां डालकर पिण्डर नदी पर अस्थायी पुल बनाया जाता है। ताकि विषम परिस्थितियों में आवागमन सुगम हो सके। लेकिन इस सुगम आवागमन में भी जान का कोई कम जोखिम नही है। अस्थायी पुल का एक भी हिस्सा टूटा या फिर पुल से पैर फिसला तो पिण्डर नदी न जाने कहाँ तक अपने साथ ले जाए। लेकिन अफसोस सोए सिस्टम को ये तस्वीर नजर नही आती। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र पंचायत सदस्य पान सिंह गड़िया, ग्राम प्रधान खीम राम, मनोज, प्रेम एवं समस्त ग्रामीणों ने भी मन बनाया है कि, अगर 2022 में होने वाले आम चुनाव से पहले पुल नही बनता है तो ग्रामीण विधानसभा चुनाव का पुरजोर बहिष्कार करेंगे।

वहीं लोक निर्माण विभाग थराली के अधिशासी अभियंता मूलचंद गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि, जब तक ग्रामीण लकड़ी के पुल को तैयार नही कर लेते विभाग ट्रॉली को बन्द नही करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि, उनके द्वारा इस साल की शुरुआत में ही विभागीय सचिव को पुल का आगणन तैयार कर भेजा गया था और इस आगणन के मुताबिक पिण्डर नदी पर 120 मीटर लंबाई और 14.4 लाख की लागत के पुल का आगणन सचिव द्वारा भी शासन को भेजा जा चुका है। इस पर वित्तीय स्वीकृति मिलते ही टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

वहीं कांग्रेस नेता महावीर सिंह बिष्ट ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, वर्तमान सरकार आपदा के छुटे कामो को अभी तक भी पूरा नही कर सकी है और थराली उपचुनाव में भी सरकार के मंत्री आपदा में बहे पुलों को बनाने का वादा करके ही चुनाव जीते हैं। लेकिन अब तक भी सरकार ऐसे पुलों का निर्माण नही कर सकी है। ऐसे में जनहित के मुद्दों को लेकर कांग्रेस को अगर सड़को पर भी उतारना पड़े तो कांग्रेस पीछे नही हटेगी।

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