केदारघाटी के द्वारिका प्रसाद को मिला ‘लोक सेवा विभूषण सम्मान 2025’, प्रशासन में दो दशक की निष्ठा का सम्मान

पौड़ी–उत्तराखंड की शांत और पवित्र धरती ने एक बार फिर गौरव का अवसर प्राप्त किया है। रुद्रप्रयाग जिले के ल्वारा (गुप्तकाशी) के मूल निवासी और वर्तमान में गढ़वाल संभाग, पौड़ी में संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) एवं आरटीए सचिव के रूप में कार्यरत द्वारिका प्रसाद को उनकी वर्षों की उत्कृष्ट सेवा और जनहित में किए गए […]

पौड़ी–उत्तराखंड की शांत और पवित्र धरती ने एक बार फिर गौरव का अवसर प्राप्त किया है। रुद्रप्रयाग जिले के ल्वारा (गुप्तकाशी) के मूल निवासी और वर्तमान में गढ़वाल संभाग, पौड़ी में संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) एवं आरटीए सचिव के रूप में कार्यरत द्वारिका प्रसाद को उनकी वर्षों की उत्कृष्ट सेवा और जनहित में किए गए योगदान के लिए ‘उत्तराखंड लोक सेवा विभूषण सम्मान 2025’ प्रदान किया गया है।

संघर्षों से सिद्धि तक का सफर

किसान परिवार में जन्मे द्वारिका प्रसाद ने अत्यंत साधारण परिवेश से अपने करियर की शुरुआत की। गांव के स्कूलों से शिक्षा हासिल करते हुए उन्होंने सीमित सुविधाओं में भी अनुशासन, मेहनत और सत्यनिष्ठा को अपना आधार बनाया। इन्हीं मूल्यों ने उन्हें उन ऊँचाइयों तक पहुँचाया, जो आज पहाड़ के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं।

20 वर्षों की प्रशासनिक उत्कृष्टता

लगभग दो दशक की सेवा के दौरान द्वारिका प्रसाद ने अपने विभाग में पारदर्शिता और अनुशासन को मजबूत आधार दिया।

गढ़वाल संभाग, पौड़ी में अपनी भूमिका निभाते हुए उन्होंने सड़क सुरक्षा, जनजागरूक अभियानों और परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए। उनकी कार्यशैली ने विभाग में नई सोच और व्यवस्थित कामकाज की ऊर्जा का संचार किया, जिसे व्यापक स्तर पर सराहा गया।

सरल स्वभाव, जनसरोकारों के प्रति संवेदनशीलता

अपनी जिम्मेदारियों के साथ वे हमेशा शांत, सहज और सभी वर्गों के लिए उपलब्ध रहने वाले एक मिलनसार अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं। युवाओं को सही दिशा देने और समाजिक जागरूकता बढ़ाने की उनकी भावना उन्हें एक अधिकारी से बढ़कर जनसेवक की पहचान देती है।

केदारघाटी के लिए प्रेरणास्रोत

द्वारिका प्रसाद की उपलब्धियाँ न केवल ल्वारा गाँव, बल्कि संपूर्ण केदारघाटी के लिए सम्मान का विषय हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, ईमानदारी और निरंतर परिश्रम से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।

उनकी प्रतिबद्धता और कार्यनिष्ठा को देखते हुए जीवन निर्माण एजुकेशन सोसाइटी, रुद्रप्रयाग की टैक्सी यूनियन और स्थानीय जनता द्वारा उन्हें यह महत्वपूर्ण सम्मान प्रदान किया गया। द्वारिका प्रसाद आज उत्तराखंड के लिए गौरव और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

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