मनचले गुरुजी ने की छेड़छाड़। दबाव मे छात्रा से ही लिखाया माफीनामा

जगदम्बा कोठारी
रूद्रप्रयाग। 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर प्रदेश मे भव्य आयोजन कर सरकार बालिकाओं के समानाधिकार के बड़े बड़े दावे कर रही है लेकिन विपरीत इसके आज भी कई छात्राओं को विद्यालय मे ही अपने मनचले गुरूजिओं से आये दिन उत्पीड़न झेलना पड़ता है।
मामला जनपद के एक प्रतिष्ठित विद्यालय से जुड़ा है, जिसके प्रभारी प्रधानाचार्य पर गंभीर आरोप है कि वह बीते वर्ष 31 दिसंबर की रात्रि को छात्राओं के एनएसएस शिविर मे घुसे और उन्होंने एक छात्रा से छेड़खानी की, जिसके बाद छात्रा ने शोर मचा दिया।
 दो दिन तक मानसिक यातनायें झेलने के बाद छात्रा ने यह बात अपनी सहेलियों और सहपाठियों को बतायी। दो जनवरी को छात्रा ने अपने सहपाठी के मोबाइल फोन से पूरा घटनाक्रम जिला पंचायत अध्यक्षा को बताया, जिसके बाद महिला जनप्रतिनिधि ने तुरंत फोन कर पुलिस को पूरा घटनाक्रम बताया। पुलिस भी मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत महिला कांस्टेबल के साथ एनएसएस शिविर पहुंची। लेकिन उसके बाद पूरे घटनाक्रम पर छात्रा का ही माफीनामा सामने आया।
बताया जा रहा है कि मामले मे खुद को फंसता देख प्रधानाचार्य ने दबाव देकर छात्रा से माफीनामा लिखवा लिया  जिसमे लिखा था कि”मुझे गुरूजी ने बासी रोटी खाने को लेकर डांटा था और उसके बाद डांट से नाराज होकर मैंने महिला जनप्रतिनिधि को फोन किया। इस मामले मे मैं माफी मांगती हूं”।
जबकि छात्रा इससे पहले जिला पंचायत अध्यक्षा रूद्रप्रयाग को आपबीति सुना चुकी थी लेकिन बाद मे दबाव देकर छात्रा का बयान बदलवा दिया।
कुछ जागरुक लोगों ने सोशल मीडिया मे मामला उठाकर आरोपी प्रधानाचार्य के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की मांग की।
 खबर वायरल होने के बाद दैनिक अखबारों मे भी सुर्खियां बनी तो जनपद मे चर्चाओं का पारा और बढा गया।
बाद इसके प्रशासन हरकत मे आया तो पूरे प्रकरण मे जांच नये सिरे से शुरू हो रही है। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि मामले मे निष्पक्ष जांच की जा रही है। लिखित शिकायत न होने के कारण कुछ देरी हो रही है। प्रकरण की जांच के लिए टीमे गठित कर दी गयी हैं। वहीं पुलिस भी मामले की जांच कर रही है।
एक प्रतिष्ठित विद्यालय मे प्रधानाचार्य की इस हरकत से जनपद मे रोष का माहौल है। अन्य अभिभावकों मे भी अपनी बच्चियों की सुरक्षा को लेकर भय का माहौल बना हुआ है।
पर्वतजन पूरे घटनाक्रम पर यह कुछ सवाल उठाता है कि 2 जनवरी को प्रधानाचार्य द्वारा छेड़खानी की शिकायत के बाद जांच शुरू होने से पहली ही छात्रा से माफीनामा क्यों लिखवाया गया !
वन स्टॉप सेंटर की जाँच कहती है पीड़िता ने कहा कि,” मैंने आवेश में आकर जिला पंचायत अध्यक्षा को फोन किया.. जिसके लिए मैं माफी मांगती हूं।
*सवाल*
(1) पीड़िता ने घटना के दो दिन बाद ही फ़ोन क्यों किया। आखिर दो दिन तक भी इतना आवेश क्यों?
(2) जिले की प्रथम नागरिक से पीड़िता ने ऐसा क्या कहा कि उन्हें भी आवेश आ गया और उन्होंने पुलिस को फ़ोन कर दिया।
(3) पुलिस ने भी ऐसा क्या सुना कि पुलिस को भी आवेश आ गया और पुलिस भी रात को ही N.S.S.कैम्प पहुँच गयी।
(4) जाँच से पूर्व ही विद्यालय ने छात्रा की पहचान कैसे कर दी जो कि स्वंय मे अपराध है !
 ( 5 ) जाँच से पूर्व ही विद्यालय ने छात्रा से माफीनामा क्यों लिखवा दिया जो भी कानूनन जुर्म है।
(6) क्या जाँच टीम द्वारा जिले की प्रथम नागरिक व शिकायतकर्ता जिला पंचायत अध्यक्षा श्रीमती अमरदेई शाह से कोई जानकारी ली गयी?
( 7 ) किसी एक्सपर्ट द्वारा गोपनीय ढंग से छात्रा की काउंसलिंग की गई ?
इस पूरे प्रकरण मे क्षेत्रिय विधायक भरत चौधरी का कहना है कि जिला प्रशासन मामले की जांच कर रहा है यदि आरोपों की पुष्टी हो जाती है तो दोषी प्रधानाचार्य पर सख्त कार्यवाही होगी।

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