….तो तीन घंटे के लिए ठेके भी खुलवा दीजिये। पीएम से बड़ा सीएम का आबकारी विभाग

कृष्णा बिष्ट 
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना के कहर को देख पूरे देश को 14 अप्रैल तक के लिये लाक डाउन कर दिया है। पीएम के प्रयासों की प्रशंसा विश्व स्वास्थ्य़ संगठन ने भी की है। लेकिन राज्य के मुखिया सीएम त्रिवेंद्र रावत के शराब महकमे में इतनी जबर्दस्त बेचैनी ठेका कराने से लेकर राजस्व जमा कराने की है कि बंदी के बावजूद अधिकारियों को बुलाया व काम कराया जा रहा है। एकाएक ठेके बंद होने से राजस्व अर्जन का समूचा गणित गड़बड़ा गया है। लेकिन दून के डीओ ने सीधे सभी ठेकेदारों की बैंक गारंटी को बैंको में भेजकर 26 मार्च तक नगद भुगतान के आदेश दिये गये हैं।
 तर्क दिया गया है कि राजस्व ठेकों का अवशेष है, लिहाजा ऐसा किया जाए। जबकि ठेके अघोषित तौर पर जनता कर्फ्यू से ही बंद चले आ रहे हैं। ठेकेदारों को फऱवरी व मार्च का शराब कोटा उठाना है, इसका राजस्व पहले ही जमा है और फिर बिक्री भी करनी है। इस बीच जो ठेके रिन्यू हुए या फिर लाटरी में हासिल हुए उनकी स्थिति भी अभी तक साफ नही है।
जिलाधिकारी क्यों नही कस रहे लगाम
किसी से छिपा नही है कि राज्य सरकार के सलाहकार व उसके खास अफसरों द्वारा लाई गई आबकारी नीति जो कि पहले ही लीक हो चुकी थी,उस में बार बार संशोधन और बार बार बैकफुट पर आकर पूरी तरह से ध्वस्त कमजोर और बेहद खराब साबित हो चुकी है। बीते दिनों 28 तारीख को “पहले आओ, पहले पाओ” की तर्ज पर ठेका कराने की मंशा पर फजीहत के बाद आबकारी आयुक्त को ब्रेक लगाना पड़ा। अब राजस्व अर्जन के लिये बैंक गारंटी को बैंक भिजवाया जा रहा है। क्या जिलाधिकारियों के कंट्रोल से जिला आबकारी अधिकारी बाहर हैं ! क्या वो सिर्फ सीएम के सलाहाकार को ही सारी रिपोर्टिंग कर रहे है। जिसके दो एजेंट अधिकारी आबकारी मुख्यालय में भी बताए जाते हैं।
ठेकेदार सिर्फ लुटने के लिये हैं
दुर्भाग्य देखिये कि राज्य की डबल इंजिन सरकार में शराब ठेकेदारों पर मुसीबत के पहाड़ टूटे हैं। पहले कथित मिलावटी देशी शराब की आड में शराब ठेके बंद कराये गये जिसके नुकसान की पूर्ति नही हो सकी थी। फिर करोना के कहर में विभाग के शातिर अफसर पूरी ताकत और हनक के साथ लाटरी करा ले गये लेकिन ठेकेदारों को बीच रस्ते छोड़ गये। ठेकेदार लगता है सरकार और मोटे पेट वाले अफसरों के पेट भरने मात्र के लिये है। कोई पूछने वाला नही है कि फऱवरी मार्च का जो पैसा ठेकेदार का जमा है, उसका उठान कैसे होगा  !
जबकि ठेके बंद हैं। फिर बिक्री का जमा अधिभार कैसे होगा ! क्या सरकार कोई राहत नही देने जा रही है ! नय़े नये ठेके लेकर इतरा रहे
ठेकेदारों को अभी से डर सताने लगा है। 14 अप्रैल तक का लाक लग चुका है यदि बंदी नही भी बढी तो फिर 14 दिन व ठेके खुलने तक के समय की ड्यूटी व मिलने वाली अतिरिक्त शराब की बिक्री कैसे होगी ! विभाग के जिम्मेदार बड़े अधिकारियों को मुख्यालय में बैठा अफसर चला रहा है। वो सीधे सलाहाकर से फोन कराके सीधे आदेश जारी कर देता है।

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