कांग्रेस में बढ़ी गुटबाज़ी । सबको साधने में सब नाराज

देहरादून। उत्तरखंड कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाज़ी थमने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। कांग्रेस में नेताओं के हरदा गुट, प्रीतम गुट और किशोर गुट बने हुए हैं। जो एक दूसरे की आंखों में चुभते है और कई बार एक-दूसरे पर सीधे हमले भी कर चुके हैं। इन गुटों के […]

देहरादून।

उत्तरखंड कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाज़ी थमने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। कांग्रेस में नेताओं के हरदा गुट, प्रीतम गुट और किशोर गुट बने हुए हैं। जो एक दूसरे की आंखों में चुभते है और कई बार एक-दूसरे पर सीधे हमले भी कर चुके हैं। इन गुटों के चलते ही कांग्रेस आलाकमान नेता प्रतिपक्ष के चयन को तय नहीं कर पा रहा था।

वहीं कांग्रेस में गुटबाज़ी के चलते ही अंदरूनी कलह रुकने का नाम ही नहीं ले रही हैं। कांग्रेस के बहुत से मंत्री आलाकमान के फैसलों से संतुष्ट नहीं हैं।

कांग्रेस आलाकमान ने मिशन-2022 को जीतने के लिए उत्तराखंड कांग्रेस के लगभग सभी गुटों को मान्यता दी। फिर भी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश रावत नाराज बताए जा रहे हैं, काफी लंबे समय से हरदा ये ही पद चाहते थे और अब मिलने के बाद उनकी नाराजगी की खबरे आना कांग्रेस में अंदरूनी कलह को दर्शाती हैं।

दरअसल, हरदा अपने धुर विरोधी रंजीत रावत को कार्यकारी अध्यक्ष और आर्येन्द्र शर्मा को एक कमेटी में शामिल करने को लेकर नाराज है। बताया जा रहा है कि, रंजीत का नाम पहली सूची में नहीं था, लेकिन प्रीतम के नाराजगी जाहिर करने के बाद जोड़ा गया।

साथ ही पूर्व मंत्री नवप्रभात, पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय और विधायक हरीश धामी भी खासे असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। नव प्रभात ने तो अपनी नाराजगी का खुलकर इजहार भी कर दिया है।

आपको बता दें कि, कांग्रेस आलाकमान ने नए प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष समेत अन्य कमेटियों का गठन किया हैं। हरदा को चुनाव संचालन समिति की जिम्मेदारी सौंपी गयी। गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष और प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाया हैं।

पूर्व मंत्री नवप्रभात को चुनाव घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। वे ब्राह्मण नेता के तौर पर अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार थे। जिसको लेकर वो खासे नाराज हैं। नवप्रभात ने इस जिम्मेदारी को लेने से इंकार कर दिया उन्होंने बोला कि, वो दो बार इस पद पर रह चुके हैं।

पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय भी अध्यक्ष पद के दावेदार थे, लेकिन उन्हें ज्यादा तरजीह नहीं मिली है। रंजीत की ताजपोशी से विधायक हरीश धामी भी नाराज बताए जा रहे हैं।

अब सवाल यह हैं कि, कांग्रेस में इतनी गुटबाज़ी और पार्टी में बढ़ती अंदरूनी कलह के बाद कैसे उत्तराखंड में कांग्रेस मिशन 2022 को फतह कर पाएगी।

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