माफी जारी, पर अनुमति गायब: देवघार रेंज में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

त्यूणी (देहरादून), 10 अप्रैल 2026

रिपोर्ट – नीरज उत्तराखंडी

त्यूणी क्षेत्र के देवघार रेंज में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। वर्ष 2025-26 के लिए वन विभाग द्वारा माफी (वन उपज/लकड़ी की स्वीकृति) जारी किए जाने के बावजूद अब तक कटान (लकड़ी की कटाई) और परिवहन की अनुमति नहीं दी गई है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा माफी तैयार कर ली गई है, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। इसके चलते माफी के वास्तविक हकदार अपने पारंपरिक अधिकारों के तहत जंगल से लकड़ी काटकर मशीन के माध्यम से घर तक नहीं ला पा रहे हैं। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए आर्थिक और दैनिक जीवन दोनों स्तरों पर कठिनाई पैदा कर रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मकान निर्माण, मरम्मत और ईंधन जैसी आवश्यकताओं के लिए वन उपज पर निर्भरता बनी रहती है।

ऐसे में समय पर अनुमति न मिलने से उनकी आजीविका और आवश्यक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इसे अपने “हक-हुकूम” से वंचित किए जाने जैसा बताया है।

हकहकूक और पन्ना लाल सेटलमेंट एक्ट का संदर्भ

गौरतलब है कि जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में पन्ना लाल सेटलमेंट एक्ट के अंतर्गत स्थानीय लोगों को हकहकूक के तहत माफी की लकड़ी प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है।

इस व्यवस्था के तहत ग्रामीणों को अपने घरेलू उपयोग—जैसे मकान निर्माण, मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्यों—के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वन उपज लेने की अनुमति दी जाती रही है।

ऐसे में माफी जारी होने के बावजूद कटान और परिवहन अनुमति लंबित रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है, बल्कि इसे परंपरागत अधिकारों के हनन के रूप में भी देखा जा रहा है।

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जनप्रतिनिधि भी आए आगे

मामले की गंभीरता को देखते हुए त्यूणी क्षेत्र के भाजपा मंडल अध्यक्ष नीरज शर्मा ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर माफी से जुड़ी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि विभाग को पारदर्शिता बरतते हुए पात्र लोगों को जल्द अनुमति प्रदान करनी चाहिए, ताकि अनावश्यक असंतोष की स्थिति न बने।

विधानसभा तक पहुंचा मामला

बताते चलें कि यह मुद्दा पहले ही विधानसभा सत्र के दौरान क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह द्वारा उठाया जा चुका है। इस पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मामले के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया था। बावजूद इसके, अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ पाया है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है।

आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कटान और परिवहन की अनुमति जारी नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की मांग

क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से मांग की है कि माफी को सार्वजनिक किया जाए और उससे संबंधित सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर पात्र लोगों को अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

बहरहाल, देवघार रेंज में माफी के बावजूद कटान और परिवहन अनुमति लंबित रहने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। हकहकूक से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है। यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह विवाद बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

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