लीद से लाइट तक: केदारनाथ में बायोमास पेलेट्स का पायलट प्रोजेक्ट मंजूर

देहरादून, 16 जनवरी 2026: चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर खच्चरों से उत्पन्न होने वाली लीद (गोबर) की समस्या को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से हल करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने इस संबंध में पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसके तहत […]

देहरादून, 16 जनवरी 2026: चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर खच्चरों से उत्पन्न होने वाली लीद (गोबर) की समस्या को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से हल करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने इस संबंध में पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसके तहत खच्चरों की लीद और पिरुल (चीड़ की सूखी पत्तियां) से बायोमास पेलेट्स तैयार किए जाएंगे।

यह योजना पहली बार राज्य में इस तरह की पहल है, जो न केवल पैदल मार्ग की स्वच्छता सुनिश्चित करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी। यात्रा सीजन के दौरान गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक श्रद्धालुओं को ले जाने के लिए लगभग 8,000 से अधिक खच्चरों का उपयोग होता है, जिससे मार्ग पर बड़ी मात्रा में लीद जमा हो जाती है और यह पर्यावरण के लिए चुनौती बन जाती है।

प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर हर दो किलोमीटर की दूरी पर लीद संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों से एकत्रित लीद को पिरुल के साथ मिलाकर बायोमास पेलेट्स का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए धाम के निकट एक प्लांट लगाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 1.43 करोड़ रुपये है। यह प्लांट पर्यटन विभाग के तत्वावधान में संचालित होगा।

उत्पादित बायोमास पेलेट्स को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाएगा, जैसे कि पानी गर्म करने और अन्य ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए। प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले तरल उप-उत्पाद का उपयोग उर्वरक के रूप में भी किया जा सकेगा।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में गोबर से बायोमास पेलेट्स बनाने की प्रथा पहले से मौजूद है, लेकिन खच्चरों की लीद और पिरुल के संयोजन से यह पहली बार होगा। इस नवोन्मेषी कदम से न केवल पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय निवासियों को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। संग्रह, परिवहन और उत्पादन प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को शामिल किया जाएगा।

यह परियोजना चारधाम यात्रा को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तारित करने की संभावना है।

Also Read This

क्राइम : देहरादून में दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग से हड़कंप। एक को लगी गोली,एक आरोपी गिरफ्तार,अन्य फरार 

देहरादून। पटेलनगर इंडस्ट्रियल एरिया में एसजीआरआर विश्वविद्यालय और दैनिक जागरण कार्यालय के पास गुरुवार को पुरानी रंजिश के चलते युवकों के दो गुटों के...

Raksha Bandhan 2026: 27 या 28 अगस्त? जानिए कब बांधी जाएगी राखी

Raksha Bandhan 2026 Date: भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि...

Related Posts