संस्कृति की झलक : दिखने लगी पहाड़ो में होलियारों की टीम

इंद्रजीत असवाल

पौड़ी गढ़वाल

सतपुली : 

पहाड़ो से पलायन होने के कारण आज गांव में युवाओं की संख्या न के बराबर है, जिसका सीधा प्रभाव होली त्योहार पर भी पड़ा है |

पहाड़ो में पहले लोग गांव गांव जाकर होली गाते खेलते थे, लेकिन आज आधुनिक दौर में लोग इस त्योहार को भूल से गए हैं|

सतपुली की होलियार टीम आज भी अपनी संस्कृति को बचाने के लिए बड़े छोटे बाजारों में जाकर पारम्परिक रूप से होली के गीत गाते हैं व अपनी आने वाली पीढ़ी को जोड़ने के लिये व उनको ये दिखाने के लिए की कभी हमारे पूर्वज इसी तरह होली मनाते थे| 

टीम में मनीष खुगशाल स्वतंत्र , डबल मिया, धन्ना नेगी, प्रेम सिंह अंकल, आदि थे| 

📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए पर्वतजन को फॉलो करें

👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें 📲 App Download करें

Related Posts