हल्द्वानी: बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला, इलाका छावनी में तब्दील

हल्द्वानी। नैनीताल जिले के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर जमीन पर हुए अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को अहम फैसला सुना सकता है। फैसले को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया है तथा भारी संख्या में पुलिस बल और […]

हल्द्वानी। नैनीताल जिले के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर जमीन पर हुए अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को अहम फैसला सुना सकता है। फैसले को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया है तथा भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी की कंपनियां तैनात कर दी गई हैं।

क्षेत्र में सात ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी रखी जा रही है। यातायात मार्गों को डायवर्ट किया गया है तथा आने-जाने वाले वाहनों की सघन जांच हो रही है। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की कड़ी निगाह है ताकि कोई अफवाह या भड़काऊ सामग्री न फैले।

पिछले साल 8 फरवरी को इसी इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी। उपद्रवियों ने थाने में आग लगा दी थी, जिसमें कई लोगों की जान गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। उस घटना के बाद से प्रशासन इस बार किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। सोमवार को ही 21 संदिग्ध उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया था जबकि 121 लोगों के खिलाफ निवारक कार्रवाई की गई थी। मंगलवार सुबह भी कुछ असामाजिक तत्वों को हिरासत में लिया गया है।

एसएसपी ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई दंगा भड़काने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश करेगा तो उसे सीधे जेल भेजा जाएगा।

यह पूरा मामला वर्ष 2023 में नैनीताल हाईकोर्ट के उस आदेश से शुरू हुआ था जिसमें एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिक्रमित जमीन को खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद रेलवे और जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के कारण मामला रुक गया। तब से लगातार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

विवादित 30 हेक्टेयर जमीन पर करीब 3,660 पक्के मकान बने हुए हैं जिनमें पांच हजार से अधिक परिवार रहते हैं। अनुमान के अनुसार यहां लगभग 50 हजार लोग निवास करते हैं।

फैसला दोपहर बाद कभी भी आ सकता है। प्रशासन का दावा है कि अदालत के आदेश का शत-प्रतिशत पालन किया जाएगा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया गया है।

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