हाई कोर्ट ने बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राज्य और केंद्र सरकार को दिए बड़े निर्देश !

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- 

उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने राज्य में फैल रहे कोरोनावायरस के संबंध में राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर अपना सुरक्षित रखा फैसला आज सुना दिया है । अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली व अन्य की जनहित याचिकाओं पर अपना निर्णय सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश आर.एस.चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने राज्य और केंद्र सरकार को ये निर्देश दिए है :-

(1) प्रतिदिन होने वाले टैस्ट की संख्या राज्य तेजी से बढ़ाये, क्योंकि आई.सी.एम.आर.के निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार टैस्ट की संख्या घटा नहीं सकती । 

(2)केंद्र सरकार को आदेशित किया जाता है कि वह राज्य की ऑक्सीजन का कोटा 183 मैट्रिक टन से 300 मैट्रिक टन किए जाने पर गंभीरता से विचार करें।

(3) केंद्र सरकार इस बात पर भी विचार करें कि उत्तराखंड का बहुत बड़ा हिस्सा पर्वती क्षेत्र है, जहां पर निरंतर ऑक्सीजन की सप्लाई की आवश्यकता पड़ेगी, इसलिए राज्य सरकार द्वारा केंद्र को इस संबंध में की गई मांग जिसमें 10,000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर 10,000 ऑक्सीजन सिलेंडर 30 प्रेशर स्विंग ऑक्सीजन प्लांट तथा 200 सी.ए.पी.और 200 बाइपेप मशीन के साथ एक लाख पल्स ऑक्सीमीटर की मांग की गई है, इसपर केंद्र सरकार गंभीरता से निर्णय ले।

(4)राज्य सरकार का केंद्र को अपनी ऑक्सीजन के कोटे का प्रयोग अपने ही उत्पादन से करने की प्रार्थना पर केंद्र सरकार एक सप्ताह में निर्णय ले।

(5)राज्य सरकार को आदेशित किया गया है कि वह चार धाम के लिए जारी एस.ओ.पी.का पालन गंभीरता से करें और इस बात को सुनिश्चित करें कि पुजारियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की कोरोना से सुरक्षा हो सके।

(6)राज्य सरकार इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करें कि उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा दी गई संस्तुतियों और सुझावों का वह पूर्ण अनुपालन कर रही है

(7)राज्य सरकार को आदेशित किया जाता है कि वह भवाली सैनिटोरियम में 100 बैड का कोविड केयर सेंटर शीघ्रता से स्थापित किया जाए ।

(8)राज्य और केंद्र सरकार को आदेशित किया गया है कि वह उत्तराखंड का रेमडेसिवीर इंजेक्शन का कोटा निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें।

(9)खंडपीठ ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को निर्देशित किया है कि वह अगली तारीख पर केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय के ऐसा अधिकारी को जो उत्तराखंड सरकार के निवेदन पर निर्णय लेने में सक्षम हो, स्पष्टीकरण देने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा है।

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