हाईकोर्ट ने आपदा के सम्बंध में दायर याचिका पर केंद्र सरकार से माँगा जवाब

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- 

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चमोली के रैणी गाँव मे 7 फरवरी को आई आपदा के सम्बंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है।

आज सुनवाई के दौरान एन.टी.पी.सी.की तरफ से अपना जवाब पेश किया गया, जिसमें कहा गया कि एन.टी.पी.सी.एक जिम्मेदार कम्पनी है।

एन.टी.पी.सी.के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने बताया कि, बीती 7 फरवरी को आई आपदा में कई लोगों ने अपनी जान तक गँवा दी थी जबकि कितने ही मजदूर अभी भी लापता हैं ।

एन.टी.पी.सी.द्वारा मृतक व लापता लोगों के परिवारों को मानकों के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है। अभी तक चिन्हित 84 परिवारों को मुआवजा दे दिया गया है।

शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि, पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली आपदाओं की भविष्यवाणी करने के लिए कोई उपकरण नही लगाए गए हैं। अगर अर्ली अलार्मिंग सिस्टम लगे होते तो इतने लोगो की जान नहीं जाती।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आर.एस.चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई।

 

मामले के अनुसार अधिवक्ता पी.सी.तिवारी ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि, चमोली के रैणी गाँव की महिला गौरा देवी सहित अन्य महिलाओं ने वनों को बचाने के लिए सत्तर के दशक में एक अनूठी पहल की शुरुआत यहीं से की थी ।

जब ठेकेदार कुल्हाड़ी लेकर पेड़ कटवा रहा था तो इन महिलाओं ने पेड़ो पर चिपककर इसका विरोध किया । यही से चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई।याचिकर्ता का कहना है कि यही क्षेत्र आज आपदा की मार झेल रहा है। सात फरवरी को आई आपदा में कई लोगो के परिवार उजड़ गए और कितने लोग कंपनी और सरकार की लापरवाही के कारण मौत के गाल में समा गए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि, यह क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र है यहां नन्दा देवी बायोस्फियर क्षेत्र भी घोषित है, फिर सरकार ने यहां पर हाइड्रोपावर बनाने की अनुमति क्यों दी गयी है ? पहले भी यह क्षेत्र सवेदनशील रहा है और आपदा के दौरान राज्य के बडे बडे नेताओं और अधिकारियों ने यहां का दौरा किया ।

इसके बावजूद पीड़ितों को न तो मुआवजा दिया गया और न ही उनको न्याय मिला । जहाँ पर यह घटना हुई वहाँ पर किसी भी तरह का अर्ली अलार्मिंग सिस्टम नही लगा था, इस क्षेत्र में एवलांच को आने में 15 मीनट लगे थे अलार्मिंग सिस्टम होता तो कई लोगो की जान बच सकती थी। याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में यह प्राथर्ना की है कि आपदा पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाया जाय। न्यायालय आपदा में उजड़े परिवारों  के लिए सरकार और कम्पनी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चलाए क्योंकि यह आपदा सरकार और कम्पनियो की लापवाही के कारण घटित हुई।

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