गजब: “थप्पड़ मार दूंगा तो कुछ नहीं कर पाओगे।” शिक्षा मंत्री के लाइजनर ने जिला शिक्षा अधिकारी को धमकाया

“थप्पड़ मार दूंगा तो कुछ नहीं कर पाओगे।” शिक्षा मंत्री के लाइजनर ने जिला शिक्षा अधिकारी को धमकाया उत्तराखंड। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के लाइजन ऑफिसर सुरेंद्र पाल सिंह ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को धमकाते हुए कहा कि, “देखते-देखते थप्पड़ पड़ जाता है, मैं तुम्हें थप्पड़ मार दूंगा तो तुम कुछ नहीं कर पाओगे।” बेसिक […]

“थप्पड़ मार दूंगा तो कुछ नहीं कर पाओगे।” शिक्षा मंत्री के लाइजनर ने जिला शिक्षा अधिकारी को धमकाया

उत्तराखंड। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के लाइजन ऑफिसर सुरेंद्र पाल सिंह ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को धमकाते हुए कहा कि, “देखते-देखते थप्पड़ पड़ जाता है, मैं तुम्हें थप्पड़ मार दूंगा तो तुम कुछ नहीं कर पाओगे।” बेसिक जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे को लिखी एक चिट्ठी में उनके लाइजन अफसर के खिलाफ कुछ इस तरह की शिकायत की है।

प्राथमिक शिक्षा के जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा मंत्री को लिखे पत्र में उनके लाइजन अफसर पर आरोप लगाते हुए कहा कि, वह उन्हें नियम विरुद्ध पोस्टिंग के लिए दबाव डाल रहे थे। जब उन्होंने सेवा नियमावली का हवाला देते हुए ऐसा करने में असमर्थता जताई तो फिर उन्होंने अभद्रता करते हुए कहा कि “मुझसे इतना एटीट्यूड क्यों दिखा रहे हो ! जितना कहा जा रहा है उतना करें।”

लाइजन अफसर इतने पर ही नहीं रुके, बल्कि यह भी कह दिया कि “यहां पर देखते-देखते थप्पड़ पड़ जाता है मैं तुम्हें थप्पड़ मार दूंगा तो तुम कुछ नहीं कर पाओगे।”

शिक्षा अधिकारी जितेंद्र सक्सेना ने कहा कि, लाइजन अफसर ने उन्हें बडकी उत्तरकाशी के स्थानीय सिरोर के बालिका स्कूल में एक अध्यापक को पदोन्नति के बावजूद यथा स्थान रखने के संबंध में बात की। लेकिन जब उन्हें नियमावली का हवाला देते हुए कहा गया कि, बालिका विद्यालय में केवल महिला अध्यापक ही पदस्थापित की जा सकती है, तो फिर उन्होंने इस तरह से अभद्रता की। गौरतलब है कि, 11 तारीख को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का अस्कोट से आराकोट हरेला कार्यक्रम के अंतर्गत एक दौरा था। जिसमें चिन्यालीसौड़ के एक गेस्ट हाउस में 10 जुलाई को सुबह यह वाकया हुआ।

एक अहम सवाल यह भी है कि, पहले इस घटना की सूचना जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ने विद्यालय शिक्षा महानिदेशक को दी थी, किंतु महानिदेशक ने स्वयं कार्यवाही करने की बजाय इस संबंध में शिक्षा मंत्री को अवगत कराने के लिए कहा। क्या यह जिम्मेदारी विद्यालय शिक्षा महानिदेशक की नहीं बनती थी कि, वह पहले स्वयं इस पर कुछ एक्शन लेते! जितेंद्र सक्सेना ने यह पत्र 11 जुलाई को लिखा है। इस पर अभी तक क्या कार्रवाई हुई है यह साफ नहीं है।

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