अगर आप क्रिसमस पर कहीं घूमने का प्लान बना रहे है तो नैनिताल में स्थित इन ऐतिहासिक चर्चों में जरूर जाएं

अगर आप क्रिसमस पर कहीं घूमने का प्लान बना रहे है तो नैनिताल में स्थित इन ऐतिहासिक चर्चों में जरूर जाएं

रिपोर्ट- कमल जगाती
नैनीताल। उत्तराखंड की प्रमुख पर्यटन नगरी नैनीताल जितना अपनी झीलों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है उतना ही इस शहर में ब्रिटिश काल में बने चर्चो का भी महत्व है। गौथिक शैली में बने इन चर्चों की खूबसूरती देखते ही बनती है। नैनीताल में क्रिसमस को धूमधाम से मनानेे के लिए चर्चों (गिरजा घरो) को सजाया जा रहा है। नैनीताल की मालरोड में बने एशिया के सबसे पुराने मेथोडिस्ट चर्च को ब्रिटिश काल में बनाया गया था। इस चर्च की स्थापना अमेरिकन पादरी विलियम बटलर ने 1858 में आयुक्त सर हेनरी रैमसे की मदद से की थी।

इसके साथ ही मालरोड में स्थित दूसरा चर्च सेंट फ्रांसिस कैथलिक चर्च है, जिसे वर्ष 1868 में इटली के क्रिस्चियन कम्युनिटी ने बनाया था, जो लेक चर्च के नाम से भी जाना जाता है। वहीं नगर के पश्चिमी पहाड़ी पर बने सबसे पहले चर्च सेंट जोंस इन द विल्डरनेस की अपनी ही मान्यताए है। गॉथिक शैली से बने इस चर्च को जनता के लिए 1850 में खोल दिया गया था। 18 सितंबर 1880 को नैनीताल में हुए भूस्खलन में 151 लोगो ने जान गंवाई थी, जिनकी याद में हर वर्ष क्रिस्चियन समुदाय के स्कूलों द्वारा यहां प्रार्थना की जाती है। साथ ही प्रथम विश्व युद्ध में मारे गए आई.सी.एस. अधिकारियों की स्मृति चिन्ह भी इस चर्च में मौजूद है।

सेंट जोंस चर्च से लगे कब्रिस्तान में जिम कॉर्बेट के माता पिता की कब्र होने से भी इस चर्च की अहमियत बढ़ जाती है। सरोवर नगरी में मेथोडिस्ट चर्च और सेंट फ्रांसिस कैथोलिक चर्च की ऐतिहासिक बिल्डिंगें ठीक नैनीझील के ऊपर होने से इनका महत्वता और भी बढ़ जाता है। क्रिसमस के दौरान पर्यटक इन धरोहरों के बारे में जानने के लिए पहुंचते हैं। चर्चों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। क्रिसमस की पूर्व संध्या में क्रिस्चियन समुदाय के लोग चर्च में मोमबत्ती जलाकर प्रार्थना करते हैं।

इस मौके पर यह लोग बड़े दिन का स्वागत प्रभु यीशू के गीत गाकर करते हैं और सभी लोगों के भले की कामना करते है। चर्च के फादर हेनरी ने बताया कि, क्रिसमस की तैयारी एक दिसंबर से शुरू होती है जिसमें पाप स्वीकारना, अच्छे कार्यो के साथ जरूरतमंदों की सहायता करने पर बल दिया जाता है। उन्होंने बताया कि कोविड महामारी को देखते हुए 25 दिसंबर को दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक चर्च को दर्शन के लिए बन्द किया जाएगा।

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