जीरो टॉलरेंस की सरकार में भ्रष्टाचारी अधिकारियों का बोलबाला

जीरो टॉलरेंस की सरकार में भ्रष्टाचारी अधिकारियों का बोलबाला

रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
थराली। जीरो टॉलरेंस की सरकार में भ्रष्टाचारी अधिकारियों का बोलबाला। प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के दावे करती रहती है। लेकिन सूबे की भाजपा सरकार में ऐसे लापरवाह अधिकारी भी पहाड़ी क्षेत्रों में हैं जो अपनी जिम्मेदारियों को न निभाते नजर आये। ऐसे ही एक लापरवाह अधिकारी देवाल विकासखण्ड के पशु चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर सावन पंवार है। पेशे से पशु चिकित्साप्रभारी ये डॉक्टर 2017 में नियुक्ति के बाद से ही अपने मुख्यालय से गायब है।

विवाद हैं कि, 2017 में देवाल पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्साप्रभारी का दायित्व सम्भानले के बाद से ये डॉक्टर कभी पशु चिकित्सालय में नजर ही नही आये। देवाल के पशुपालक और स्थानीय बताते हैं कि, साहब बस महीने में एक बार तनख्वाह निकालने देवाल पशु चिकित्सालय पहुंच जाते हैं। बस उसी दिन पूरे महीने की हाजिरी रजिस्टर में भरकर फिर से रफू चक्कर भी हो जाते हैं।

देवाल के जनप्रतिनिधियों के मुताबिक पशु चिकित्सालय देवाल में तैनात डॉ सावन पंवार की दबंगई ऐसी है कि, आला अधिकारी भी इस पशु चिकित्साप्रभारी के बारे में कुछ भी बोलने से बस हिचकिचाते ही है। 2017 में देवाल में तैनाती के ठीक अगले ही वर्ष यानी 2018 में ही जिला पशु चिकित्साधिकारी की ये नोबत आन पड़ी की उन्हें पशु चिकित्सालय वाण में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डॉ नितिन बिष्ट को देवाल पशु चिकित्सालय का अतिरिक्त प्रभार देना पड़ा। कारण था तो केवल डॉ सावन पंवार की अपने कर्तव्यों और ड्यूटी के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुशासनहीनता के मामले में पहले भी डॉ सावन पंवार आला अधिकारियों की डांट से लेकर कारण बताओ नोटिस तक पा चुके हैं। बावजूद इसके सरकारी तंत्र का ये बेलगाम घोड़ा संभलने का नाम तक नही ले रहा। विकासखण्ड देवाल के जनप्रतिनिधि बताते हैं कि, सूबे की सरकार के किसी सफेदपोश नेता के संरक्षण में डॉ सावन पंवार नियम कायदों को ठेंगा दिखाते आ रहे हैं। सरकार के बड़े कैबिनेट मंत्री का संरक्षण प्राप्त यह डॉक्टर अपनी मनमानी के चलते सरकार के जीरो टॉलरेंस को पलीता तो लगा ही रहा है। साथ ही सरकार की साख पर भी बट्टा लगा रहा है।

जब हमने इस संदर्भ में पशु चिकित्सा प्रभारी सावंत पंवार से जानने की कोशिश की तो उनका साफ तौर पर कहना है कि, उनकी तबीयत खराब थी। वह मेडिकल पर थे। कुछ पारिवारिक परिस्थितियां भी सही नहीं थी, जिसके चलते वह उच्च अधिकारियों से छुट्टी लेकर गए हुए थे। सोचने वाली बात यह है कि, 3 साल से अधिकारी अपने जिम्मेदारियों से भागते नजर आए। ऐसे में देवाल विकासखंड की जनता को स्वरोजगार संबंधी लाभ कैसे मिल पाएगा। कई लोग भेड़ पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन आदि से स्थानीय लोग अपना रोजगार चलाना चाहते थे। परंतु चिकित्साप्रभारी ही गायब हैं तो क्षेत्रीय जनता को रोजगार कहां से मिल पाएगा। दफ्तरों के चक्कर काट रही जनता निराश, हताश और अपने को लाचार महसूस कर रही है।

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