शासकीय विद्यालयों का अनुदान समाप्त करने पर बढ़ा विरोध

शासकीय विद्यालयों का अनुदान समाप्त करने पर बढ़ा विरोध

माध्यमिक शिक्षा के एक पत्र के संदर्भ में निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने समस्त जनपदों को एक पत्र प्रेषित किया है, जिसमें विद्यालयों की छात्र संख्या और परिणाम का आकलन कर समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अनुदान वापस लेकर प्रबंधकीय व्यवस्था से ही विद्यालय चलाने की धमकी तक दी गई है। इस संदर्भ में उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ का स्पष्ट मत है कि, अनुदान प्राप्त विद्यालयों को वित्तीय सहायता, वेतन वितरण अधिनियम 1971 के अंतर्गत प्राप्त है। इस अधिनियम से शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा प्राप्त है। इस अधिनियम से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।

भविष्य में वित्त विहीन विद्यालयों को अनुदान देने की नीति सरकार बना सकती है। अनुदान दे ना दे या किन शर्तों पर दे। लेकिन अनुदान प्राप्त विद्यालयों से अनुदान निरस्त करने की बात कहना हास्यास्पद है। यदि सरकार शासन या विभाग इस सम्बन्ध में कोई भी छेड़छाड़ करने की कोशिश करती है तो ऐसी स्थिति में शिक्षक और कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ किसी भी कीमत पर अनुदान प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात नहीं होने देगा।

ऐसा लगता है कि, इस तुगलकी फरमान निकालने वाले अनु सचिव को वेतन वितरण अधिनियम 1971 में सेवा सुरक्षा शर्तों की जानकारी ही नहीं है। इस सम्बंध में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव से शीघ्र मिलकर इस पत्र की दुर्भावना के संदर्भ में कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा। दूरभाष के माध्यम से उचित स्तर पर आवश्यक वार्ता हुई भी है।

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