बड़ी खबर: इन दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों को अंतरिम राहत। केंद्र के आदेशों पर अगली सुनवाई तक स्टे

देहरादून।08 अप्रैल 2026 रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों—नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी—को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने केंद्र सरकार के प्रतिनियुक्ति आदेशों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इस अंतरिम आदेश के बाद दोनों अधिकारियों को फिलहाल केंद्र में डीआईजी रैंक पर जॉइन करने […]

देहरादून।08 अप्रैल 2026
रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी

उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों—नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी—को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने केंद्र सरकार के प्रतिनियुक्ति आदेशों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

इस अंतरिम आदेश के बाद दोनों अधिकारियों को फिलहाल केंद्र में डीआईजी रैंक पर जॉइन करने से छूट मिल गई है।

क्या है मामला

दरअसल, गृह मंत्रालय ने 5 मार्च 2026 को आदेश जारी कर 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को भारत तिब्बत सीमा पुलिस तथा 2006 बैच के अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पद पर प्रतिनियुक्ति दी थी। इसके अगले दिन 6 मार्च को उत्तराखंड सरकार ने दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त भी कर दिया।

हालांकि, इसी क्रम में 2005 बैच के एक अन्य अधिकारी मुख्तार मोहसिन को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो में डिप्टी डायरेक्टर (डीआईजी रैंक) पर तैनाती मिली, लेकिन पद रिक्त न होने के कारण उन्हें रिलीव नहीं किया गया।

अधिकारियों की आपत्ति

दोनों अधिकारियों ने CAT में याचिका दायर कर केंद्र के आदेश को चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि वे वर्तमान में आईजी रैंक पर कार्यरत हैं, जबकि केंद्र में उन्हें एक रैंक नीचे डीआईजी पद पर भेजा जा रहा है, जो सेवा नियमों के विपरीत है।

साथ ही, बिना स्पष्ट सहमति प्रतिनियुक्ति आदेश जारी करने और समान बैच के अधिकारियों के साथ अलग व्यवहार को भी चुनौती दी गई।

CAT का रुख

प्रारंभिक सुनवाई में अधिकरण ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार के आदेशों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। अधिकरण ने माना कि रैंक में कमी और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।

कानूनी पहलू

विशेषज्ञों के अनुसार, All India Services Rules के तहत प्रतिनियुक्ति में अधिकारी की रैंक और सेवा शर्तों का संरक्षण आवश्यक है। ऐसे में रैंक घटाकर तैनाती का मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है।

आगे की कार्रवाई

अब इस मामले में अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। CAT के अंतिम निर्णय से न केवल संबंधित अधिकारियों का भविष्य तय होगा, बल्कि केंद्र-राज्य प्रतिनियुक्ति नीति पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।

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