जिला पंचायतों में 12 में से 11 जिलों मे ‘मातृसत्ता’ 

कृष्णा बिष्ट 
उत्तराखंड में नौ जिला पंचायत की कुर्सियों पर भाजपा की महिला प्रत्याशी विजयी हुई हैं तो तीन जिलों की तीन जिलों की कुर्सियां कांग्रेस के हाथ लगी है।
भाजपा के चार पहले ही निर्विरोध चुने जा सके थे बाकी आठ पर चुनाव हुआ था।
 कॉन्ग्रेस अपनी कमियों के कारण पिछड़ गई। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने इन पंचायत चुनाव में कोई रुचि नहीं दिखाई वरना स्थिति कांग्रेस के लिए कम से कम संतोषजनक हो सकती थी। भाजपा ने जहां सभी सीटों पर अपने समर्थित प्रत्याशियों की घोषणा की थी। वहीं कांग्रेस ने मात्र 5 जिलों में अपने समर्थित प्रत्याशियों की घोषणा की थी।
 इससे शुरुआत से ही भाजपा को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल चुकी थी, जिससे वे निर्दलीय तथा कांग्रेसी प्रत्याशियों को भी अपने पाले में खींचने में सफल रहे।
 भाजपा समर्थित प्रत्याशियों में से बागेश्वर से भाजपा की बसंती देवी, टिहरी से सोना देवी, पौड़ी से शांति देवी, रुद्रप्रयाग से अमर देई, देहरादून से मधु चौहान, सफल रही।
 वहीं उधम सिंह नगर से रेनू गंगवार, चंपावत से ज्योति राय, नैनीताल से बेला तोलिया  और पिथौरागढ़ से दीपिका  भाजपा की निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गई।
 कांग्रेस की ओर से अल्मोड़ा से उमा सिंह, चमोली से रजनी भंडारी और उत्तरकाशी से दीपक बिजल्वाण जिला पंचायत की कुर्सी पर काबिज होने में सफल रहे।
ब्लाक प्रमुख की कुर्सियों पर भी भाजपा का ही दबदबा रहा। प्रदेश के कुल 89 ब्लाक प्रमुख के पदों में से 45 ब्लॉक प्रमुख भाजपा से बने हैं तो कांग्रेस के 26 प्रत्याशी विजयी रहे। निर्दलियों ने भी अट्ठारह ब्लाक प्रमुख के पदों पर विजय प्राप्त की। राजनीतिक मंदी के इस दौर में कांग्रेस के लिए ब्लॉक प्रमुखों का परिणाम ‘कुछ नहीं से कुछ भला’ जैसा है।

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