घटिया व गुणवत्ताहीन मैटिरियल का प्रयोग कर करोडों का बजट लगाया जा रहा ठिकाने

जगदम्बा कोठारी

डबल इंजन सरकार द्वारा जहां विकास के बड़े बड़े दावे हो रहे है वहीं निर्माण कार्यों मे भी भ्रष्टाचार की जड़े गहरी होती जा रही हैं। जिसका एक बड़ा उदाहरण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना द्वारा निर्मित यह सड़क है।

टिहरी जनपद के दूरस्थ एंव सीमांत विकासखंड भिलंगना की अति पिछड़ी पट्टी गंगी को आजादी के 70 वर्षों बाद सड़क मार्ग से जोड़ा तो गया, लेकिन पीएमजीएसवाई विभाग और कार्यदायी संस्था पीआईयू वाप्कोश लिमिटेड की मिलीभगत से निर्माण कार्य मे मानकों के विपरीत घटिया व गुणवत्ता हीन मैटिरियल का प्रयोग कर करोडों का बजट ठिकाने लगाया जा रहा है।
घनसाली विधानसभा के अति पिछड़े इस क्षेत्र मे 17 वर्षों के लम्बे आंदोलन के बाद केद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 20 किलोमीटर मोटर मार्ग स्वीकृत तो किया, लेकिन सड़क निर्माण मे सड़क कटिंग से लेकर फेज टू के निर्माण कार्य मे कहीं पर भी तय मानकों प्रयोग नहीं किया गया है। विपरीत इसके चिनाई के काम पर रेत की जगह मिट्टी लगायी जा रही है, जिसे आप भी साफ देख सकते हैं। स्थानीय ग्रामीण भजन सिंह रावत, शंकर सिंह,मंगल सिंह, कनक सिंह, जगत सिंह सहित ग्रामिणों ने संबन्धित विभाग सहित कार्यदायी संस्था पर सांठ-गांठ का आरोप लगाते हुए बताया कि यह बीस किलोमीटर लम्बा मोटर मार्ग वर्ष 2016-17 स्वीकृत हुआ था। यह मोटर मार्ग गंगी पट्टी के देवलंग, रीह, लोंडी, नलाल गांवों से होते हुए पर्यटन क्षेत्र सहस्त्रताल समेत खतलिंग ग्लेशियर तक दुर्गम पहाड़ियों से गुजरता है लेकिन ठेकेदार ने पहले ही फेज का कार्य पूरा नहीं किया और फेज टू का कार्य समाप्ति की ओर है। उन्होंने बताया कि इस मोटर मार्ग पर रीह नामक जगह पर लगभग तीन करोड़ की लागत से पुल निर्माण चल रहा है।

पुश्ता निर्माण छोड़ भी दें तो लेकिन पुल निर्माण मे भी क्रशर मैटिरियल की जगह स्थानीय रोड़ी लगायी जा रही है, चिनाई मे रेत की जगह मिट्टी मिलाई जा रही है और तकनिकी खांमियों को भी नहीं सुधारा जा रहा है जिस कारण भविष्य मे कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

इस विषय मे कई बार विभाग और घनसाली से भाजपा विधायक शक्तिलाल शाह को लिखित और मौखिक अवगत कराया जा चुका है लेकिन ठेकेदार की मनमानियों का दौर जारी है।
जिला पंचायत सदस्या श्रीमती सीता रावत ने शासन प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र दोषियों के विरूद्द कार्यवाही नहीं की गयी तो सीमांत गंगी सहित दर्जनों गांव आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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