दून अस्पताल में खत्म होंगी लंबी कतारें, हर फ्लोर पर रजिस्ट्रेशन काउंटर और ओपीडी से ही भर्ती की सुविधा शुरू

देहरादून। उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुधवार से मरीजों को बड़ी सहूलियत मिलनी शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी में बढ़ती भीड़ और लंबी कतारों की समस्या को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब ओपीडी भवन के प्रत्येक तल पर रजिस्ट्रेशन काउंटर […]

देहरादून। उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुधवार से मरीजों को बड़ी सहूलियत मिलनी शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी में बढ़ती भीड़ और लंबी कतारों की समस्या को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब ओपीडी भवन के प्रत्येक तल पर रजिस्ट्रेशन काउंटर संचालित किए जा रहे हैं।

 

अब तक पंजीकरण की सुविधा मुख्य रूप से ओपीडी ब्लॉक के भूतल तक सीमित थी, जहां सुबह से ही मरीजों और उनके परिजनों की लंबी लाइनें लग जाती थीं। पर्चा बनवाने में काफी समय लगने के कारण उपचार प्रक्रिया प्रभावित होती थी और मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ता था। 11 फरवरी से काउंटरों की संख्या बढ़ाकर अलग-अलग फ्लोर पर सुविधा उपलब्ध करा दी गई है, जिससे प्रतीक्षा समय में कमी आने की उम्मीद है।

 

अस्पताल प्रशासन ने आयुष्मान योजना से जुड़े मरीजों के लिए भी व्यवस्था सुदृढ़ की है। सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक ओपीडी समय के दौरान आयुष्मान काउंटर सक्रिय रहेंगे। गेट नंबर 2 और गेट नंबर 5 पर पहले से संचालित काउंटरों के अतिरिक्त अब मुख्य रजिस्ट्रेशन काउंटर के समीप भी नया आयुष्मान काउंटर शुरू कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि ओपीडी से भर्ती होने वाले मरीजों को सड़क पार कर दूर स्थित काउंटरों तक न जाना पड़े।

 

इससे पहले कई मरीजों को भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए इमरजेंसी विभाग जाना पड़ता था, जबकि ओपीडी और आपातकालीन भवन अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं। इस कारण मरीजों और तीमारदारों को परेशानी होती थी और इमरजेंसी विभाग पर अनावश्यक दबाव भी बढ़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ओपीडी से ही भर्ती की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

 

दून अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि यह निर्णय जनसंवाद के बाद लिया गया। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए त्वरित समाधान सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि अब मरीजों को पंजीकरण और भर्ती के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा, जिससे समय की बचत होगी और उपचार में तेजी आएगी।

 

अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इस कदम से गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों को इमरजेंसी में अधिक त्वरित चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सकेगी। अधिकारियों के अनुसार यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को सुव्यवस्थित और मरीज-केंद्रित बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।

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