बड़ी खबर : पुलिस महानिदेशक ने पर्वतजन का लिया संज्ञान। मुस्लिमों के आर्थिक बहिष्कार पर अफसरों को दिए निर्देश।

पुलिस महानिदेशक लॉ एंड ऑर्डर अशोक कुमार ने भी माना है कि उत्तराखंड के पर्वतीय तथा मैदानी क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सामाजिक वैमनस्यता बढ़ रही है और धार्मिक ध्रुवीकरण हो रहा है।

अशोक कुमार ने पर्वतजन न्यूज़ पोर्टल की खबर का संज्ञान लेते हुए लिखा है कि देहरादून में ठेली पर फल सब्जी विक्रय करने वाले कई व्यक्तियों द्वारा जय श्री राम और हिंदू वाले सब्जी ले लो जैसे संबोधनों के साथ सब्जी व फल विक्रय करने संबंधी समाचार प्रकाशित हुए हैं।

पर्वतजन ने किया था आगाह

अशोक कुमार ने पर्वतजन न्यूज़ पोर्टल का जिक्र अपने परम गोपनीय तथा अति आवश्यक महत्वपूर्ण पत्र में करते हुए समस्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि समय से आवश्यक कार्यवाही करने की जरूरत है, ताकि कोई अप्रिय घटना घटित ना होने पाए और कानून व्यवस्था बनी रहे।

हालांकि यह एक दूसरा मुद्दा है कि परम गोपनीय यह पत्र लीक कैसे हो गया! क्या पुलिस महकमे में दो धड़े हैं जो ऐसे परम गोपनीय पत्रों को भी लीक करा देते हैं।

बहरहाल पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने लिखा है कि तबलीग जमात मरकज निजामुद्दीन में प्रतिभाग करने आए कतिपय जमातियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के उपरांत सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं परिलक्षित हैं जिनमें से मुस्लिम समुदाय का आर्थिक बहिष्कार करते हुए उनसे दूध फल सब्जी आदि न खरीदने के लिए अपील की जा रही है और पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित मस्जिदों को हटाए जाने तथा उन पर कठोर प्रतिबंध लगाए जाने सहित उन पर बिच्छू घास से पिटाई करने के मामले सामने आए हैं।

पुलिस महानिदेशक ने माना कि पर्वतीय क्षेत्रों में मुस्लिमों का आर्थिक बहिष्कार ज्यादा मुखर है और अब देहरादून की अधिकांश सब्जी मंडियों में मुस्लिम फल व सब्जी विक्रेताओं की संख्या में कमी आई है।

इस पत्र में आगे जिक्र है कि फल व सब्जी विक्रेताओं में भगवा रंग के पट्टे और गमछे धारण करने, माथे पर तिलक लगाकर स्वयं को हिंदू प्रदर्शित करने की प्रवृत्ति विकसित हो रही है और कुछ सब्जी विक्रेताओं द्वारा माथे पर लाल टीका लगाकर फल सब्जी विक्रय किया जा रहा है।

इसके साथ ही इस पत्र में यह भी जिक्र है कि मुस्लिम समुदाय के फल सब्जी विक्रेताओं द्वारा अपनी रेहड़ी ठेली को सड़क के एक तरफ तथा हिंदू समुदाय के विक्रेताओं द्वारा सड़क के दूसरी तरफ खड़े कर व्यवसाय किया जा रहा है।

कतिपय आवासीय कालोनियों में मुख्य द्वार पर फल सब्जी विक्रेता के नाम की आईडी मांगी जाने के प्रकरण सामने आ रहे हैं और पर्वतीय क्षेत्रों के गांव में व्यापार के लिए मुस्लिमों का आना प्रतिबंधित होने विषयक पोस्टर लगाए जाने की अपील की जा रही है।

मुस्लिम दूध विक्रेताओं से दूध लेने वाले कतिपय हिंदुओं ने दूध देना बंद कर दिया है। खास करके हरिद्वार में वन गुर्जरों में इसको लेकर प्रतिक्रिया हो रही है तथा मुस्लिम मुस्लिम विक्रेताओं की रेहड़ी ठेली हटाए जाने के साथ ही उनको चेतावनी भी दी जा रही है।

बहरहाल अहम सवाल यह भी है कि यह पत्र परम गोपनीय होने के बावजूद लीक कैसे हो गया !

क्या इस पत्र को लीक कराने के पीछे किसी समुदाय विशेष को हित या अहित पहुंचाना है यह भी अपने आप में जांच का विषय हो सकता है।

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